Published On : Tue, Jun 23rd, 2015

यवतमाल : साढ़े तिन गुना बढ़ गई है लागत

 

  • वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेल लाईन परियोजना 
  • केंद्र से मिले मिले 1.42 करोड़
  • 279 कि.मी. होगी परियोजना

Yavatmal railway Track
यवतमाल।
वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेल 279 कि.मी. लाईन की परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार की लापरवाही और कोई न कोई कारण बताकर उनके हिस्से की राशि देने में बड़ा विलंब करने से इस परियोजना की लागत साढ़ेतीन गुना बढ़ गई है. 2008-09 के रेल बजेट में इस परियोजना की लागत मात्र 697 करोड़ रुपए थी जो अब बढ़कर 2505 करोड़ हों चुकी है. इसके विपरीत ऊंट के मुंह में जिरा समान राशि राज्य और केंद्र सरकार दे रही है. आज राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के 40 फिसदी हिस्से में से 1 करोड़ 42 लाख रुपए देने के लिए मंजूरी दी है. जबकि महंगाई के कारण लागत इससे कई ज्यादा बढ़ गई है. इसके पहले जितनी भी राशि प्राप्त हुई वह रेल लाईन के सर्वे, रेल लाईन के बीच आनेवाले खेत खरीदने और जहां जरूरी है वहां पुलिया बनाने के लिए खर्च हों चुकी है. इसलिए यह रेल लाईन यवतमालवासियों के लिए सपना लग
रहीं है.

वर्ष 2008-09 में तत्कालीन रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव ने वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ इस ब्रॉडगेज रेललाईन को मंजूरी देकर यवतमाल जैसे पिछड़े जिले को रेल से सलग्र करने के लिए हरीझेंडी बतलाई थी. उन्होंने लोकसभा चुनाव के प्रचार के समय यवतमाल के पोस्टल ग्राऊंड में इस परियोजना की कोनशिला का आनावरण किया था. उस समय उन्होंने यह रेल लाईन बनाने का आश्वासन दिया था, मगर बाद के चुनाव में आये परीणाम के कारण लालूप्रसाद सत्ता में नहीं थे और उसकेे बाद आये रेल मंत्रियों ने इस रेललाईन के लिए सकारात्मक दृष्टि नहीं अपनाई. 279 कि.मी. लंबी इस रेल लाईन के लिए कुल 2505 करोड़ की राशि निवेश की जाएगी. जिसमें राज्य सरकार का हिस्सा 1002 करोड़ और केंद्र सरकार का हिस्सा 1503 करोड़ होगा. यह रेशो राज्य और केंद्र का क्रमश: 40 और 60 फिसदी है.