Published On : Wed, Jun 10th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

यशोधरा नगर हत्याकांड में बड़ा मोड़: अदालत ने आरोपी की गिरफ्तारी को बताया अवैध, तत्काल रिहाई के आदेश

रविकांत कांबले | नागपुर टुडे
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नागपुर के चर्चित यशोधरा नगर हत्याकांड में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ सामने आया, जब न्यायालय ने आरोपी की गिरफ्तारी प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत मानते हुए गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया और आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया।

यशोधरा नगर पुलिस थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 454/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) एवं 3(5) के अंतर्गत आरोपी मुज्जमिल उर्फ मुज्जू हसन अली को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए पुलिस ने आरोपी की चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) की मांग की थी।

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सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी API पाटिल ने पुलिस पक्ष रखते हुए न्यायालय को बताया कि अपराध गंभीर एवं गैर-जमानती प्रकृति का है तथा मामले की जांच प्रारंभिक अवस्था में होने के कारण आरोपी से विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। पुलिस ने दावा किया कि हत्या प्रकरण के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए आरोपी की हिरासत जरूरी है।

वहीं आरोपी की ओर से अधिवक्ता कमल सतुजा, अधिवक्ता कैलाश डोडानी, अधिवक्ता भूषण सचदेव एवं अधिवक्ता अनमोल गोस्वामी ने पैरवी करते हुए गिरफ्तारी की वैधता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। बचाव पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आरोपी केवल नौवीं कक्षा तक शिक्षित है तथा उसे केवल हिंदी भाषा का ज्ञान है। इसके बावजूद गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) उसे मराठी भाषा में उपलब्ध कराए गए, जिसे वह समझने में सक्षम नहीं है।

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बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि गिरफ्तारी के आधारों में यह उल्लेख तक नहीं किया गया कि आरोपी को उक्त जानकारी किस समय प्रदान की गई। अधिवक्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के विहान कुमार तथा मीर शाह प्रकरणों में दिए गए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के कारण उसकी समझ में आने वाली भाषा में स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य है। साथ ही गिरफ्तारी संबंधी प्रक्रिया का समय और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज किया जाना भी कानूनी रूप से आवश्यक है। इन प्रावधानों का पालन न किए जाने के कारण गिरफ्तारी को अवैध माना जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) एम. डी. बिरहारी ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के अवलोकन से गिरफ्तारी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। न्यायालय ने माना कि आरोपी को उसकी समझ की भाषा में गिरफ्तारी के आधार प्रभावी रूप से बताए जाने तथा संबंधित प्रक्रिया का समुचित पालन किए जाने के पर्याप्त प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं।

इसी आधार पर न्यायालय ने पुलिस की रिमांड याचिका खारिज करते हुए आरोपी की गिरफ्तारी को अवैध ठहराया और उसे तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

यशोधरा नगर हत्याकांड पहले से ही शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब अदालत द्वारा गिरफ्तारी प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी किए जाने के बाद यह मामला कानूनी और जांच, दोनों स्तरों पर नए मोड़ पर पहुंच गया है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई तथा मामले की आगे की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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