Published On : Wed, May 8th, 2019

विश्व थेलिसेमिया दिन : शादी के लिए कुंडली की जगह खून की करें जांच

डॉ. रुघवानी ने की बोनमैरो ट्रांसप्लांटेशन निशुल्क करने की मांग

नागपुर: थेलिसिमिया से बचाव के लिए विवाह के पहले कुंडली मिलाने की जगह खीन की जांच बेहद महत्वपूर्ण है. यह बात थेलेसिमिया सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के संचालक डॉ. विंकी रूघवानी ने विश्व थेलेसिमिया दिन के अवसर पर कही.

प्रत्येक वर्ष ८ मई को विश्व भर में थेलिसिमिया दिवस मनाया जाता है. इस सम्बन्ध में उन्होंने जानकारी दी कि थेलेसिमिया रोग अनुवांशिक होने के कारण इसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है. इस रोग से पीड़ितों को दीर्घायु देने के लिए नियमित उपचार सेवाभाव के साथ करने की जरूरत है. इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि समाज में इस रोग से सम्बन्धी जागरुकता निरंतर होनी चाहिए. यह रोग पंजाबी,गुजराती,सिंधी,पारसी,बंगाली, मुस्लिम और आदिवासियों में ज्यादा पाई जाती है. अन्य समुदाय में भी यह हलके प्रमाण में पाया जाता है.

थेलिसिमिया रोगी के शरीर पीले पड़ जाते हैं. भूक,वचन व चंचलता में कमी होने से यह प्राणघातक भी हो सकता है.

इन पीड़ितों में रक्त की कमी के कारण बारंबार पीड़ितों को रक्त चढ़ाया जाता है. इन पीड़ितों का इलाज कठिनाई भरा होने के साथ ही खर्चीला भी होता है. हर रोगी को सिर्फ दवा पर ३ से ४ हज़ार रुपए मासिक खर्च आता है. इस क्षेत्र में सबसे महंगा और स्थाई इलाज भी है, जिसे बोनमैरो ट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है. जिसके लिए कम से कम १४ लाख रुपए खर्च आता है. उक्त इलाज प्रक्रिया को निशुल्क करने की मांग डॉक्टर विंकी रूघवानी ने केंद्र व राज्य सरकार से की है.

याद रहे कि वर्तमान जिलाधिकारी अश्विन मुदगल के प्रयासों से राज्य सरकार ने थेलिसीमियाग्रस्तों को दिव्यांगता का प्रमाणपत्र व सुविधाएं मुहैय्या करवा रहे हैं.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्ष २०१६ में जरीपटका में रुघवानी चाइल्ड केयर सेंटर का उद्धघाटन किया था. इस सेंटर में थेलेसिमिया और सिकलसेल रोग का नियमित व निशुल्क इलाज उन्नत पद्धति से किया जाता है.

विगत वर्ष बोनमैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सहायता निधि से प्रत्येक को ३ लाख रुपए देने घोषणा की थी. रुघवानी के अनुसार थेलिसिमिया ग्रस्तों को बारम्बार रक्त चढ़ाने के क्रम में एड्स, हेपेटाइटस आदि संक्रमण का डर बना रहता है.

विदर्भ में ४५० और जिले में २५० थेलिसिमिया के मरीज हैं. इनका जीवन बचाने के लिए इन्हें नियमित रक्त चढ़ाना पड़ता है. उल्लेखनीय यह है कि थेलिसिमिया के पुरुष और महिलाएं उतनी अड़चन में नहीं होते जितनी दोनों रोगियों के मध्य जाने-अनजाने में विवाह के बाद होने वाले बच्चों को रोग से मुक्ति दिलाने में होती है. इसलिए विवाह पूर्व कुंडली मिलान के साथ ही साथ रक्त जांच की अनिवार्यता से इस रोग से बचा जा सकता है.