Published On : Sat, Jul 4th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

एथेनॉल विवाद: जब पेट्रोलियम मंत्री कोई और हैं, तो निशाने पर नितिन गडकरी क्यों?

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देशभर में इन दिनों E20 पेट्रोल और एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनलों तक लोग सवाल पूछ रहे हैं—क्या एथेनॉल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है? क्या पुराने इंजन सुरक्षित हैं? और सबसे बड़ा सवाल…

अगर एथेनॉल से जुड़ी नीति पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आती है, तो आलोचना केवल नितिन गडकरी की ही क्यों हो रही है?

इस सवाल का जवाब समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत में एथेनॉल नीति की जिम्मेदारी किन-किन मंत्रालयों के पास है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग की जिम्मेदारी किस मंत्रालय की है?

भारत में एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है।

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यही मंत्रालय तय करता है कि—

  • पेट्रोल में कितना प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाएगा।
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) एथेनॉल कैसे खरीदेंगी।
  • देशभर के पेट्रोल पंपों तक E20 पेट्रोल कैसे पहुंचेगा।
  • एथेनॉल खरीद और वितरण की नीति क्या होगी।

इस मंत्रालय के वर्तमान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी हैं।

फिर नितिन गडकरी चर्चा के केंद्र में क्यों हैं?

हालांकि नितिन गडकरी पेट्रोलियम मंत्री नहीं हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से वे एथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं।

उन्होंने लगातार—

  • एथेनॉल को पेट्रोल का विकल्प बताया,
  • फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) वाहनों को बढ़ावा दिया,
  • E20, E85 और E100 जैसे ईंधनों की वकालत की,
  • और कहा कि इससे भारत का कच्चे तेल का आयात कम होगा तथा किसानों की आय बढ़ेगी।

नई तकनीक वाली गाड़ियों के लॉन्च से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक, गडकरी लगातार एथेनॉल के पक्ष में बोलते रहे हैं। यही कारण है कि आम जनता के मन में एथेनॉल नीति का चेहरा नितिन गडकरी बन गए हैं।

जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं

यहीं सबसे बड़ा भ्रम पैदा होता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की जिम्मेदारी है—

  • E20 पेट्रोल लागू करना,
  • एथेनॉल की खरीद,
  • तेल कंपनियों के माध्यम से आपूर्ति,
  • और ब्लेंडिंग नीति का संचालन।

वहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, जिसके मंत्री नितिन गडकरी हैं, की जिम्मेदारी है—

  • ऐसे वाहनों के लिए नियम बनाना जो E20 या उससे अधिक एथेनॉल वाले ईंधन पर चल सकें।
  • ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को बढ़ावा देना।
  • वाहन सुरक्षा और तकनीकी मानकों को तय करना।

यानी…

एक मंत्रालय ईंधन उपलब्ध कराता है, जबकि दूसरा मंत्रालय यह सुनिश्चित करता है कि वाहन उस ईंधन पर सुरक्षित रूप से चल सकें।

विवाद क्यों बढ़ा?

हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर हुई टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। इसके बाद कई लोगों ने माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता और E20 पेट्रोल को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

हालांकि सरकार ने बाद में अपना पक्ष स्पष्ट किया, लेकिन तब तक यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका था।

क्या केवल गडकरी को जिम्मेदार ठहराना उचित है?

अगर सवाल है—

  • E20 पेट्रोल की उपलब्धता,
  • एथेनॉल ब्लेंडिंग,
  • ईंधन नीति,
  • या तेल कंपनियों के संचालन का,

तो इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की है।

लेकिन यदि चर्चा है—

  • एथेनॉल आधारित परिवहन,
  • फ्लेक्स-फ्यूल वाहन,
  • वैकल्पिक ईंधन,
  • और भविष्य की मोबिलिटी की,

तो नितिन गडकरी इस सोच के सबसे प्रमुख समर्थकों में रहे हैं।

यही वजह है कि जनता की नजर में एथेनॉल नीति का सबसे बड़ा चेहरा वही बन गए हैं, भले ही इस कार्यक्रम का प्रशासनिक संचालन उनके मंत्रालय के पास नहीं है।

एथेनॉल पर चल रही बहस में तथ्यों और जिम्मेदारियों के बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है।

नितिन गडकरी एथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था के सबसे मुखर समर्थक हैं, लेकिन E20 पेट्रोल की नीति और उसका क्रियान्वयन मुख्य रूप से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन आता है।

लोकतंत्र में किसी भी नीति पर सवाल उठाना स्वाभाविक है, लेकिन जवाबदेही तय करते समय यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि किस मंत्रालय की भूमिका क्या है। तभी इस विषय पर निष्पक्ष और तथ्यात्मक चर्चा संभव हो सकेगी।

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