Published On : Fri, Feb 22nd, 2019

‘वतन पर मिट गए बेटे कहां से लाओगे’

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उत्तर भारतीय संघ के ‘एक शाम-शहीदों के नाम’ कवि सम्मेलन ने जगाया देशभक्ति का जज्बा

नागपुर : उत्तर भारतीय संघ की नूतन कार्यकारिणी के स्नेह-मिलन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ‘एक शाम-शहीदों के नाम’ का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने पुलवामा में शहीद सैनिकों को समर्पित रचनाओं से देशभक्ति का जज्बा श्रोताओं में जगाया।

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रामकृष्ण नगर दत्तवाड़ी स्थित रामकृष्ण सभागृह में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व मंत्री सतीश चतुर्वेदी ने की। कवि सम्मेलन में नैनीताल की प्रसिद्ध कवयित्री गौरी मिश्रा, प्रतापगढ़ की कवयित्री ज्योति त्रिपाठी, भोपाल की संगीता सरल, बिलासपुर के नीरज जैन तथा नागपुर के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गीतकार शशिकांत शर्मा, सफर जौनपुरी तथा अजय पांडेय आदि ने अपनी देशभक्ति के रस में डूबी ओजपूर्ण रचनाओं से लोगों में जोश भर दिया।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से पधारी कवयित्री ज्योति त्रिपाठी ने देशभक्ति की रचनाओं से लोगों में देशभक्ति का संचार किया। सीमा पर तैनात जवान की मां और पत्नी के संवादों के साथ ही सैनिक के संवादों ने मन को छू लिया। उनकी पंक्तियां थीं- राष्ट्रभक्ति से बड़ा होता है कोई किरदार नहीं।
वतन पर मिट गए बेटे कहां से लाओगे शहादत पर क्या कभी आंंख से आंख मिला पाओगे।

डा. शशिकांत शर्मा ने सैनिकों के प्रति भावनाओं को इन पंक्तियां में व्यक्त किया-
‘न होली ईद दिवाली, हर दिन मधुमास होता है
समर का काल सैनिकों का सदा मधुमास होता है
न मां की ओढ़नी की छांव है, संबल न अपनों का
बढ़ाता हौसला हर पल, तिरंगा पास होता है।’

नैनीताल से पधारी कवयित्री ने ओजपूर्ण रचनाओं के साथ ही श्रृंगारिक कविताओं से दिल जीत लिया। उनकी इन पंक्तियों ने खूब वाहवाही बटोरी-
‘जहां दुश्वार है आहें, वहीं आराम लिखा है।

यूं लगता है मोहब्बत का कोई पैगाम लिखा है।’
भोपाल की संगीता सरल, सफर जौनपुरी तथा अजय पांडेय आदि ने अपनी देशभक्ति के रस में डूबी रचनाएं प्रस्तुत की। बिलासपुर के नीरज जैन ने व्यंग्य कविताओं से हंसाकर लोटपोट कर दिया। संचालन सफर जौनपुरी ने किया।

इस अवसर पर उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष रामनारायण मिश्रा, कार्याध्यक्ष श्याममूर्ति पांडेय, महामंत्री ओमप्रकाश मिश्र, कोषाध्यक्ष ब्रजेशनंदन सिंह, शिवपाल सिंह, माताप्रसाद दुबे, प्रेमशंकर चौबे, लक्ष्मण सिंह, मनोजकुमार सिंह प्रमुखता से उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ब्रजेशनंदन सिंह ने किया।

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