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    Published On : Fri, Nov 2nd, 2018

    वाधवानी ने खुद को किया दिवालिया घोषित

    गांधीबाग,इतवारी,मसकसाथ के व्यापारियों का पैसा डूबा?

    नागपुर : नागपुर शहर का चर्चित नाम हैं वाधवानी। इनमें से कोई एपीएमसी की राजनीत तो कोई महापौर बंगले खरीदने और तो कोई भूमाफिया के रूप में चर्चित हैं. इन दिनों एक और वाधवानी तब चर्चे में आया जब उसने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया।

    हुआ यूँ कि कुछ दिनों पहले एक अन्य वाधवानी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया,इससे उसे ब्याज पर लाखों-करोड़ों रूपए दिए थे.इसका जमीन खरीद-बिक्री और भवन निर्माण का कार्य हैं.वाधवानी ने ब्याज पर पैसे लेते वक़्त काफी लुभावने वादे किये थे,जब ब्याज सह मूल राशि लौटने की बारी आई तो खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। इन्हें ज्यादातर लोहे के व्यापारियों ने पैसे ब्याज पर दिए थे.

    इन्हीं में से एक वाधवानी के कार से हैदराबाद मार्ग पर १० करोड़ नगदी पकड़ाए,जब खुद पर आंच आई तो मुकर गए,इनकी लॉकर व्यवसाय आयकर विभाग ने सील कर दी हैं.

    एक अन्य वाधवानी पिछले वर्ष तब चर्चे में आया था जब एक भूमाफिया को शहर पुलिस ने धर-दबोचा था,इनका सदर अंजुमन बिल्डिंग में कार्यालय हैं.तब इनके कार्यालय में भी छापा पड़ा था और जमीनों के कागजात जप्त किये गए थे.अपराध शाखा की पूछताछ के बाद जमानत पर रिहा हुए थे.

    इसके पूर्व इस वाधवानी ने मनपा चुनाव में किसी विधायक के कहने पर भाजपा उम्मीदवार विक्की कुकरेजा को हराने और कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश जग्यासी के पक्ष में खुलेआम प्रचार करते चर्चे में आये थे.

    और इससे पहले जब इसी वाधवानी ने बैरामजी टाउन स्थित महापौर का बंगला खरीद चर्चे में बने थे.

    कच्चे का धंधा करने वाले लोहे व्यापारियों में हड़कंप

    लोहे के व्यापारियों जिन्होंने वाधवानी को कच्चे में नगदी लाखों-करोड़ रूपए ब्याज पर दिए थे,वे सदमे में हैं कि दिए गए रूपए वसूल कैसे होंगी।

    नागपुर बाजार में लोहे का व्यापार कच्चे में होता हैं,सम्बंधित विभाग भी अनभिज्ञ नहीं हैं.जीएसटी के शुरू होते ही लगभग ६-८ माह अड़चन रही,अब जीएसटी से संबंधितों से समझौता होने के कारण पूर्ण शबाब पर कच्चे में धंधा शुरू हैं,अमूमन सम्पूर्ण लोहा व्यवसाय में से नाममात्र ही जीएसटी भर रहे हैं.नागपुर से मुंबई सह नागपुर जिले के आसपास के जिलों में व्यापार होता हैं,जबकि आता रायपुर से हैं.

    नागपुर शहर में रोजाना ५० से ६० ट्रक लोहा आता हैं.इनदिनों सबसे ज्यादा लोहा सरकारी परियोजनाओं में लग रहा,क्यूंकि सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों को उधारी में लोहा चाहिए इसलिए वे नागपुर के लोहा बाजार से व्यवहार कर रहे.इनसे होने वाली कच्चे की कमाई कोई और ठग ले जाये तो सदमा होना लाजमी हैं.


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