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    Published On : Fri, Oct 12th, 2018

    एम्स का पाठ्यक्रम शुरू होते ही मिला निदेशक

    नागपुर : बहुप्रतीक्षित और राज्य सरकार के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था (एम्स) के एमबीबीएस पाठ्यक्रम को शुरू हुए महीना भर भी नहीं बीता, इस दौरान सरकार ने संस्थान के निदेशक पद पर अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति कर दी. इस पद पर मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता की नियुक्ति की गई है. संस्थान को निदेशक मिलने से अब जनवरी महिने में ही ओपीडी विभाग के शुरू होने की उम्मीदें जताई जा रही हैं.

    केवल नागपुर एम्स ही नहीं केंद्रीय चयन मंडल ने आंध्र प्रदेश के मंगलागिरि एम्स के निदेशक पद पर डॉ. मुकेश त्रिपाठी और इसी तरह पश्चिम बंगाल के कल्याणी एम्स में के निदेशक पद पर डॉ. दीपिका की नियुक्ति अगले पांच साल के लिए की है.

    बता दें कि मिहान में २५२ एकड़ में ‘एम्स’ साकारा जा रहा है. लेकिन इसे बनने में और चार साल का समय लगने का अनुमान है. इसलिए काम चलाऊ तौर पर नागपुर मेडिकल कॉलेज में सितंबर महीने से ‘एम्स’ का शैक्षणिक वर्ष शुरू किया गया. एमबीबीएस की ५० सीटों पर विद्यार्थ्यों को प्रवेश दिया गया है. निदेशक न होने से कामकाज ‘एम्स’ के उपसंचालक लेफ्टनंट कर्नल मनोजकुमार बक्षी देख रहे थे. इमारत का निर्माणकार्य, पद भरती व शैक्षणिक सत्र की बड़ी जबाबदारी उन पर आई थी. लेकिन अब स्थाई
    निदेशक उपलब्ध होने से ‘एम्स’ के विकास को गति मिलेगी. विशेष तौर पर दिसंबर २०१८ में ‘एम्स’ के पहले चरण में निर्माणकार्य पूरा होने की संभावना है.

    जानकारी के लिए बता दें, मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता डीयू यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज की छात्रा थीं. ३० नवंबर १९८३ में सेना में मेडिकल विभाग से जुड़ गईं. फिर पुणे के आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज’से पैथोलॉजी में एमडी किया. साथ ही टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से ट्यूमर हिस्टोपाथ’ व ब्रिटन के ‘क्वीन एलिझाबेथ हॉस्पिटल’ से यकृत प्रत्यारोपण पॅथालॉजी का प्रशिक्षण लिया. एम्स दिल्ली में उन्होंने आॅन्कोलॉजी पॅथालॉजी में ‘पीएचडी’ की. हालही में वे रिटायर हुईं हैं. उनके बेहतरीन कामों को देखते हुए उन्हें ‘सैन्य पदक’, ‘सेना प्रमुख’ और ‘वेस्टर्न कमांड’ प्रमुख के सम्मान से विभूषित किया जा चुका है.

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