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    Published On : Thu, Oct 3rd, 2019
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    ब्रेस्ट कैंसर की समय पर जांच और जागरूकता आवश्यरक है- डॉ. सुशील मानधनिया

    ब्रेस्टि कैंसर पूरी दुनिया में महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण है। पूरी दुनिया में अक्टूमबर महीना हर साल ‘स्तचन कैंसर जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस ब्रेस्ट कैंसर की समय पर जांच के प्रति जागरूकता के महत्व के बारे में बताने के लिये मनाया जाता है। ऐसा माना गया है कि भारत में 22 में से एक 1 महिला को अपने पूरे जीवनकाल में कभी ना कभी ब्रेस्टा कैंसर का खतरा रहता है। वैसे यूएस में यह संख्यात ज्या्दा है, वहां 8 में से एक 1 महिला को अपने पूरे जीवनकाल में ब्रेस्टर कैंसर का खतरा रहता है।

    पूरी दुनिया में ब्रेस्ट कैंसर के 16,70,000 मामले हर साल दर्ज होते हैं, जिनमें हर साल 5,21,000 मौतें दर्ज की गयी हैं। यह भारत में पाया जाने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है।

    भारत में हमने पाया कि हर साल 92,000 मौत के मामलों के साथ 1,45,000 नये मामले दर्ज होते हैं। भारत में ग्रामीणों की तुलना में शहरियों में ब्रेस्टआ कैंसर के मामले ज्या0दा पाये जाते हैं। लेकिन पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में सबसे चिंताजक बात यह है कि

    1) आयु कम हो गयी है: ज्याकदा संख्या0 युवा महिलाओं की
    30-40 साल की महिलाओं में सबसे ज्याहदा आम
    >50% मरीज 50 साल से कम उम्र की
    2) मामलों में वृद्धि
    3) देरी से जांच
    4) जीवन की संभावना कम हुई है
    5) जागरूकता का अभाव
    6) जांच का अभाव

    क्यों होता है लोगों में ब्रेस्ट कैंसर?
    ब्रेस्ट कैंसर उस स्थिति में होता है जब ब्रेस्ट‍ की सामान्य कोशिकाओं में बदलाव होता है और उनकी संख्या नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ब्रेस्टत कैंसर ज्या‍दा आम होता है। लेकिन पुरुषों को भी यह बीमारी हो सकती है। औरों की तुलना में उन महिलाओं में इसके होने का खतरा ज्या्दा होता है जिनमें कुछ खास कारक होते हैं। जोखिम के कारक की वजह से इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है।

    खतरे के ऐसे कारण जिन्हें बदला नहीं जा सकता
    उम्र: ब्रेस्टा कैंसर के होने का खतरा उम्र के साथ बढ़ जाता है। जिन महिलाओं में इसका पता चला उनमें से ज्याादातर की उम्र 60 साल से अधिक थी।

    व्य क्तिगत हेल्थख हिस्ट्री : एक ब्रेस्ट में कैंसर होने पर इसके दूसरे ब्रेस्ट में होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही कुछ असामान्यग प्रकार के ब्रेस्टह सेल्सि के होने से इनवेंसिव ब्रेस्टट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

    फैमिली हेल्थ हिस्ट्रीस: ब्रेस्टव कैंसर का खतरा उन महिलाओं में ज्याादा होता है जिनके करीबी रिश्तेतदारों में यह बीमारी होती है। फर्स्ट –डिग्री रिलेटिव (मां, बहन या बेटी) में ब्रेस्टज कैंसर होने से महिला में इसके होने का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। दो फर्स्ट डिग्री रिलेटिव में इसका खतरा 3 गुना बढ़ जाता है।

    आनुवांशिक जोखिम के कारक: ऐसा माना जाता है कि लगभग 5-10 प्रतिशत ब्रेस्टा कैंसर आनुवांशिक होते हैं, जोकि सीधे तौर पर पेरेंट से वंशानुगत जीन्स में गड़बड़ी (म्यु5टेशन) का परिणाम होता है।

    ब्रेस्टं कोशिकाओं का सघन होना: जिन महिलाओं में ब्रेस्ट कोशिका (जैसा कि मेमोग्राम में नज़र आता है) सघन होती है उनमें ग्रंथि संबंधी उत्तकक वसा उत्तसकों की तुलना में कम होते हैं और उनमें ब्रेस्टत कैंसर का खतरा दोगुना होता है।

    पूर्व में कराया गया चेस्टक रेडिएशन: महिला (बच्चे या वयस्कस के रूप में) जिनमें किसी और कैंसर (हॉजकिन रोग या गैर-हॉजकिन लिंफोमा) के लिये चेस्ट के आस-पास के हिस्से का रेडिएशन किया गया हो, उनमें ब्रेस्टस कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

    जोखिम के ऐसे कारण जिन्हेंक बदला जा सकता है/जीवनशैली-संबंधी कारण
    मेनोपॉज के बाद वजन का अत्य धिक बढ़ना या मोटापा: जिन महिलाओं का वजन ज्या दा है या वे मोटापे का शिकार हैं तो मेनोपॉज के बाद उनमें ब्रेस्ट‍ कैंसर होने का खतरा ज्याहदा बढ़ जाता है।

    शारीरिक सक्रियता में कमी: ऐसी महिलाएं जो अपनी पूरी जिंदगी में शारीरिक रूप से असक्रिय रहती हैं उनमें ब्रेस्टि कैंसर होने का खतरा हो सकता है।

    शराब का सेवन: अध्य:यनों में यह बताया गया है कि जो महिलाएं जितनी अधिक मात्रा में शराब का सेवन करती हैं उनमें ब्रेस्टक कैंसर होने का खतरा उतना अधिक होता है।

    स्तसनपान: कुछ अध्य।यनों में यह बताया गया है कि स्तननपान से ब्रेस्टश कैंसर का खतरा कम हो जाता है, खासतौर से यदि स्त नपान डेढ़ से दो साल तक लगातार कराया गया हो।

    ब्रेस्ट कैंसर की समय पर जांच
    समय पर पता चलने का मतलब है एक ऐसा तरीका है, जिसमें ब्रेस्टं कैंसर का पता उसके फैलने से पहले ही चल जाता है।

    स्क्री निंग
    स्क्री निंग का अर्थ है कैंसर जैसी बीमारी का पता लगाने के लिये जांच और परीक्षण, ऐसे लोगों में जिनमें इसके कोई लक्षण नज़र नहीं आते।

    ‘अमेरिकन कैंसर सोसाइटी’ ब्रेस्टब कैंसर की स्क्री निंग के लिये निम्न लिखित दिशानिर्देश देती है
    • 40 साल की उम्र से हर साल मेमोग्राम करवाना और तब तक करवाना जब तक महिला की सेहत ठीक है।
    • हर साल 40 साल की महिलाओं और उसके बाद भी क्लीवनिकल ब्रेस्टस एग्ज़ा म (डॉक्टशर द्वारा ब्रेस्टस की फिजिकल जांच)
    • 20 से 30 साल की महिलाओं में हर 3 साल पर ब्रेस्ट का परीक्षण
    • महिलाओं को यह बात पता होनी चाहिये कि उनके ब्रेस्टं सामान्यी तौर पर कैसे नज़र आते हैं और महसूस होते हैं और ब्रेस्टर में किसी तरह का बदलाव होने पर तुंरत ही डॉक्ट्र को दिखायें। ब्रेस्टत की स्व़यं जांच करने का कार्य 20 साल की उम्र में ही शुरू कर देना चाहिये।

    कुछ महिलाओं को अपनी फैमिली हिस्ट्रीय, जेनेटिक कारणों या अन्यत खास कारणों से मेमोग्राम के साथ एमआरआई स्क्री निंग करानी चाहिये।
    स्क्री।निंग मेमोग्राम
    मेमोग्राम ब्रेस्टम के अंदर उत्तटकों की एक एक्सण-रे तस्वीरर होती है। मेमोग्राम में कई बार ऐसी गांठें नज़र आ जाती हैं जो खुद से महसूस नहीं हो पातीं। इसमें कैल्शियम के छोटे-छोटे कणों के समूह भी नज़र आ सकते हैं। गांठें या कण कैंसर के हो सकते हैं, प्रीकैंसरस कोशिकाएं या अन्य् स्थितियां हो सकती हैं।

    ब्रेस्टस की स्वायं जांच
    इसमें महिलाएं खुद अपने दोनों ब्रेस्टज में संभावित गांठों, विकृति या सूजन की जांच कर सकती हैं और उन्हें महसूस कर सकती हैं।

    क्यां ब्रेस्ट कैंसर से बचाव किया जा सकता है?
    ब्रेस्टह कैंसर से बचाव का कोई सुनिश्चित तरीका नहीं है। लेकिन महिलाएं कुछ चीजों का पालन करके ब्रेस्टउ कैंसर के अपने खतरे को कम कर सकती हैं (खतरे के ऐसे कारक जोकि हमारे नियंत्रण में हैं)।
    – नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि का पालन करना
    – कम कैलोरी लेकर और नियमित एक्सिरसाइज करके अपने जीवनभर के वजन को कम किया जा सकता है
    – शराब का सेवन बंद करना या सीमि‍त कर देना

    जो महिलाएं कम से कम कुछ महीनों तक स्ततनपान कराती हैं अपने ब्रेस्टक कैंसर के खतरे को कम कर सकती हैं। मेनोपॉज़ के बाद हॉर्मोन थैरेपी से बचने से भी इसके बढ़ते खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

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