Published On : Tue, Aug 22nd, 2017

तीन पीढ़ियों का बचपन देख चुका है यह नंदी बैल


नागपुर: 
महाराष्ट्र की संस्कृति में पोले के बाद तान्हा (छोटा) पोला मनाया जाता है. इस दिन छोटे बच्चे अपना नंदी बैल लेकर घर घर घूमते हैं और लकड़ी के बैलों की पूजा कराते हैं। पूजन करनेवाले भी इन नन्हें किसानों को बदले में मिठाइयां और पैसे देते हैं। इस त्यौहार को लेकर छोटे बच्चों में काफी हर्षोलास और उत्साह होता है. कई लकड़ी के बनाए गए यह बैल इतने पुराने होते है कि अनेकों वर्षों तक घर में सहेजकर रखे जाते हैं. उपराजधानी में ऐसा ही एक परिवार है ‘वंजारी परिवार’ जो सौंसर के मोहगांव हवेली निवासी हैं. इस परिवार के पास जो लकड़ी का बैल है वह लगभग तीन पीढ़ियां देख चुका है और परिवार के तीन पीढ़ी के लोग इस बैल को लेकर पोले के दिन घूम चुके हैं. इस बैल को करीब आजादी के दो वर्ष बाद बनाया गया था. यानी करीब 68 साल पहले.

इस बारे में जानकारी देते हुए वंजारी परिवार के तीसरी पीढ़ी के डॉ. गोपाल वंजारी ने बताया कि राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के करीबी रहे इनके दादा डोमाजी वंजारी मोहगांव हवेली के प्रतिष्ठित किसान थे। उन्होंने सन 1949 में उनके पिता शालिकराम वंजारी के लिए यह लकड़ी का बैल बनाया था. इस नंदी बैल को बचपन में उनके पिता शालिकराम, उनके बाद उनके छोटे भाई तुलसीराम, शांताराम और गजानन छोटे पोले के दिन लेकर घूमे. इनके बाद दूसरी पीढ़ी में यह बैल लेकर डॉ. गोपाल वंजारी, प्रभाकर वंजारी और सुशिल वंजारी भी घूम चुकी हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अब वर्तमान में इस नंदी को लेकर डॉ. गोपाल वंजारी के पुत्र मयंक वंजारी इस नंदी बैल को लेकर घूमता है.


हालांकि लकड़ी के बैल पोले के लिए माता पिता की ओर से बच्चों के लिए बनाए जाते हैं. आम तौर पर बच्चे इन बैलों को दस से बारह वर्षों तक सहेज कर रखते हैं. लेकिन इतने वर्षों तक बैलों को संम्हालना अपने पुरखों की यादों को सहेजने जैसा ही है. जो समय समय पर वंजारी परिवार को अपने पुरखों के साथ अपने बचपन की याद दिला जाता है.

Gold Rate
18 Aug 2025
Gold 24 KT ₹ 1,00,100 /-
Gold 22 KT ₹ 93,100 /-
Silver/Kg ₹ 1,15,400/-
Platinum ₹ 48,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above
Advertisement
Advertisement