नागपुर: शहर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित आशिष एनएक्स शोरूम में लगी भीषण आग ने केवल एक इमारत को नहीं झुलसाया, बल्कि नागपुर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद अब अग्निशमन विभाग एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। शहरभर में फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू हो गए हैं। बिना वैध फायर एनओसी संचालित इमारतों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है।
लेकिन नागपुर के नागरिक एक सीधा सवाल पूछ रहे हैं:
अगर हजारों व्यावसायिक प्रतिष्ठान, कॉम्प्लेक्स और बहुमंजिला इमारतें वर्षों से फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी कर रही थीं, तो जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अब तक क्या कर रहे थे?
आशिष एनएक्स की आग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का रूप ले सकती है। शहर में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें मौजूद हैं जिनके पास या तो वैध फायर एनओसी नहीं है या फिर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई का स्वागत जरूर किया जा रहा है, लेकिन लोगों का गुस्सा सिर्फ भवन मालिकों तक सीमित नहीं है।
जनता जानना चाहती है:
- इन इमारतों की निगरानी कौन कर रहा था?
- निरीक्षण कब और कैसे किए गए?
- क्या पहले कभी कमियां सामने आई थीं?
- अगर आई थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- और अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदार कौन है?
ये राजनीतिक सवाल नहीं हैं। ये सीधे-सीधे सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े सवाल हैं।
नागपुर टुडे से विशेष बातचीत में मुख्य अग्निशमन अधिकारी तुषार बाराहाते ने बताया कि विभाग ने शहरभर में विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट और जांच अभियान शुरू किया है।
बाराहाते के अनुसार, जिन इमारतों में नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी व्यावसायिक और बहुमंजिला इमारतों के लिए निर्धारित अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।
अगर आज इतनी बड़ी संख्या में इमारतें जांच के दायरे में आ रही हैं, तो क्या ये कमियां पहले दिखाई नहीं देती थीं? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर व्यवस्था ने वर्षों तक आंखें मूंद रखी थीं?
हर बड़े हादसे के बाद एक जैसा दृश्य देखने को मिलता है—हड़कंप, जांच, नोटिस, समितियां, आश्वासन और सुधार के वादे। लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ फिर सामान्य हो जाता है, जब तक कोई नया हादसा व्यवस्था की खामियों को फिर उजागर नहीं कर देता।
आशिष एनएक्स अग्निकांड को भी केवल एक और दुर्घटना मानकर भुला देना आसान होगा। लेकिन यह हादसा नागपुर के लिए एक चेतावनी है।
यदि जांच में यह सामने आता है कि नियमों की अनदेखी हुई, सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, निरीक्षणों में लापरवाही बरती गई या चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, तो जवाबदेही केवल अंतिम कड़ी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
कार्रवाई चुनिंदा नहीं हो सकती।
जवाबदेही भी उतनी ही व्यापक होनी चाहिए जितनी व्यापक यह विफलता दिखाई दे रही है।
नागपुर के नागरिक सिर्फ नोटिसों की संख्या नहीं गिनेंगे। वे यह देखेंगे कि क्या वास्तव में उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई होती है जो वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं।
वे यह भी देखेंगे कि क्या जवाबदेही सिर्फ मालिकों तक सीमित रहती है या फिर उन सभी स्तरों तक पहुंचती है जहां निगरानी, अनुमोदन और प्रवर्तन की जिम्मेदारी थी।
क्योंकि जब नियम केवल कागजों पर रह जाते हैं, निरीक्षण औपचारिकता बन जाते हैं और जवाबदेही गायब हो जाती है, तब हादसे सिर्फ हादसे नहीं रह जाते।
वे एक ऐसी व्यवस्था की नाकामी बन जाते हैं जिसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी।
आशिष एनएक्स की आग भले ही बुझ चुकी हो, लेकिन उससे उठे सवाल अभी भी धधक रहे हैं।
क्या सिर्फ मालिकों पर कार्रवाई होगी, या फिर सिस्टम को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी स्वीकार करनी पड़ेगी?







