Published On : Thu, Jun 4th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

NEET की तैयारी कर रही 19 वर्षीय छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा- “अब दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं”

मऊगंज/नागपुर: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मगनिया गांव से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। डॉक्टर बनने का सपना संजोए 19 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी ने कथित तौर पर मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या कर ली। आकांक्षा नागपुर में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी और इस साल परीक्षा देने के बाद अपने चयन को लेकर काफी आशान्वित थी।

परिजनों के अनुसार, परीक्षा के बाद वह बेहद खुश थी और उसे विश्वास था कि इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हो जाएगा। लेकिन परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की खबरों ने उसे गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार का कहना है कि इसके बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा।

नागपुर में रहकर कर रही थी तैयारी

आकांक्षा पिछले कई वर्षों से डॉक्टर बनने के लिए लगातार मेहनत कर रही थी। बेहतर भविष्य और मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना लेकर वह नागपुर में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। परिवार को भी उसकी मेहनत और लगन पर पूरा भरोसा था।

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बताया जाता है कि परीक्षा देने के बाद वह अपने परिणाम को लेकर सकारात्मक थी। लेकिन बाद में सामने आई पेपर लीक की खबरों ने उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला।

धीरे-धीरे तनाव में डूबती चली गई

परिजनों का कहना है कि खबर सामने आने के बाद आकांक्षा ने लोगों से मिलना-जुलना कम कर दिया था। वह पहले की तुलना में अधिक चुप रहने लगी थी। खाना-पीना भी कम कर दिया था और अधिकतर समय अकेले रहने लगी थी।

परिवार के मुताबिक, 20 मई 2026 को उसने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

सुसाइड नोट में माता-पिता से मांगी माफी

आकांक्षा अपने पीछे एक भावुक सुसाइड नोट छोड़ गई। परिजनों के अनुसार, उसने नोट में अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उसमें दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं बची है और वह उनके सपनों को पूरा नहीं कर सकी।

बताया जा रहा है कि नोट में उसने अपने संघर्ष, निराशा और मानसिक दबाव का भी जिक्र किया है।

बेटी की पढ़ाई के लिए पिता ने उठाया कर्ज

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चौबे किसान हैं। परिवार का कहना है कि बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक संघर्ष किया।

पिता ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा रिश्तेदारों से उधार लिया और कुछ संपत्ति भी गिरवी रखनी पड़ी। आर्थिक चुनौतियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद परिवार ने आकांक्षा की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

लेकिन जिस बेटी को डॉक्टर बनाकर परिवार की तकदीर बदलने का सपना देखा गया था, वह सपना अधूरा रह गया।

परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल

घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। कांग्रेस और एनएसयूआई के नेताओं ने परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की और कर्ज चुकाने में मदद का आश्वासन दिया।

आकांक्षा की मौत ने एक बार फिर देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और ऐसे में परीक्षा संबंधी विवाद, अनिश्चितता तथा परिणामों को लेकर पैदा होने वाला तनाव कई युवाओं पर गंभीर मानसिक प्रभाव डाल सकता है।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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