Published On : Fri, Apr 19th, 2019

सरकार के तंबाकू और उससे बननेवाली वस्तुओं पर लगाम लगाने पर ही थमेगा कैंसर का जाल – डॉ. शुभ्रजीत दासगुप्ता

नागपुर: जबड़े का कैंसर, गले का कैंसर को माउथ कैंसर कहा जाता है. विदर्भ में खासकर नागपुर माउथ कैंसर के मरीजों के मामले में सबसे आगे है. क्योंकि यहां के लोग तंबाकू और गुटके का सेवन बहुत ज्यादा करते हैं. हर वर्ष माउथ कैंसर,गले के कैंसर के करीब 400 मरीजों का मेजर ऑपरेशन किया जाता है. उन मरीजों का ऑपरेशन किया जाता है. जो ऑपरेशन करने लायक होते हैं. जिनका ऑपरेशन नहीं किया जा सकता उनको रेडिएशन-थेरपि- और कीमो-थेरेपी दिया जाता है. लेकिन तीनों में से केवल सर्जरी ही मरीज को स्वस्थ कर सकती है. शुरू के स्टेज में सर्जरी होने से मरीज की सुधरने की संभावना बढ़ जाती है. सर्जरी के बाद वह कई सालों तक बिमारी से मुक्त रह सकता है. कभी कभी तीनों इलाज मरीज को दिया जाता है.

अभी मुँह का कैंसर कम उम्र के युवाओं को हो रहा है. स्कूल के बच्चों को भी हो रहा है. 20 वर्ष से लेकर 22 वर्ष के युवाओं को कैंसर होने की वजह से उनके परिवार के साथ साथ समाज को भी एक नुक्सान होता है. क्योंकि वह एक्टिव रहता है. युवाओं को कैंसर होना देश के लिए भी नुकसान है. कम उम्र के युवाओं का भी इलाज हॉस्पिटल में किया गया है. मुँह के कैंसर की चपेट में अब महिलाएं भी आ रही हैं.

30 प्रतिशत महिलाओं को यह कैंसर हो रहा है. यह कहना है शहर के चर्चित राष्ट्रसंत तुकडोजी रिजनल कैंसर हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. शुभ्रजीत दासगुप्ता का. वे ‘ नागपुर टुडे ‘ से मुँह के कैंसर पर चर्चा कर रहे थे. उन्होंने बताया कि कैंसर होने के पहले एक स्टेज आती है. जिसे सब – म्यूकस हाइड्रोसिस कहा जाता है. तम्बाकू और चुने के सेवन से यह होता है. जिसमें मरीज का मुँह नहीं खुलता है.

यह कैंसर का पहला स्टेज है. जब तक मुँह में यह कैंसर है तो वह अर्ली स्टेज है लेकिन अगर वह शरीर के दूसरे भाग में पहुंचे तो उसे एडवांस्ड स्टेज कहा जाता है. गर्दन में गांठ होने पर भी ऑपरेशन किया जा सकता है लेकिन उसके बाद ऑपरेशन करने से भी कोई लाभ नहीं हो पाता है. कैंसर का मरीज साल भर में पहले स्टेज से आखरी स्टेज पर पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि आईटी सेक्टर की लड़कियों में भी धूम्रपान का चलन बढ़ने से भी कैंसर बढ़ गया है.

डॉ. दासगुप्ता ने बताया कि हॉस्पिटल, एनजीओ और सरकार की ओर भले ही जागरुकता की जा रही है, लेकिन तम्बाकू जन्य पदार्थों पर रोक लगाने में सरकार उदासीन दिख रही है. पाबंदी के बावजूद शहर में गुटका बिक रहा है. स्कूल के बाहर भी तंबाकूजन्य पदार्थ बिक रहे हैं. उन्होंने तम्बाकू और तंबाकूजन्य पदार्थो पर सख्त और पूरी तरीके से रोक लगाने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार कैंसर के इलाज पर जीतना खर्च कर रही है अगर सरकार तंबाकू और अन्य तंबाकू से निर्मित पदार्थो पर रोक लगाती है तो वह जागरूकता से ज्यादा काम आएगा.

डॉ. दासगुप्ता ने कहा कि हॉस्पिटल में डेंटल यूनिट भी एक महीना पहले शुरू किया गया है. पूर्व वित्तमंत्री चिंदंबरम ने 40 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की है. उन्होंने कहा की डेंटल यूनिट शुरू करने का उद्देश्य यह है की दांतों में समस्या जैसे दांत हिलना, दांतों को निकालने पर भी कैंसर हो सकता है. इसकी जांच यही पर हो. इसके लिए इसकी शुरुआत की गई है. हॉस्पिटल के डेंटल यूनिट में सभी मशीने उपलब्ध है.

डेंटल के प्रमुख डॉ. अमोल हेड़ाऊ ने बताया कि अब तक यहां से 150 पेशेंट की जांच की गई है.112 मरीजों का इलाज किया जा चूका है. यहां पर 15 वर्ष से लेकर 32 वर्ष के मरीजों की संख्या ज्यादा पायी गई है. उन्होंने बताया कि मजदूर और पढ़े लिखे लोग भी यहां इलाज के लिए आए हैं.