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    Published On : Sat, Jun 30th, 2018

    संस्था संचालकों द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षकों की नौकरी पर खतरा

    नागपुर – निजी व्यवस्थापन अनुदानित अंश: अनुदानित, गैर-अनुदानित स्कूलों में शिक्षा सेवकों की भर्ती अब ‘पवित्र’ कंप्यूटर प्रणाली द्वारा की जानेवाली है. अभियोग्यता व बुद्धिमत्ता परीक्षा के तहत यह प्रणाली इस्तेमाल लाई जाएगी. जिसे लेकर इन दिनों शिक्षा संस्थाचालक डरे हुए हैं. यही नहीं सन 2012 से शिक्षा संस्थाओं द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षक भी डरे हुए हैं.

    दरअसल शिक्षा संस्थाओं की ओर से नियुक्त लेकिन शिक्षा विभाग की मान्यता प्राप्त नहीं होने के कारण अब ऐसे शिक्षकों की नौकरी पर ही खतरा मंडराने लगा है. राज्य में 3 से 5 अक्टूबर 2011 के दरम्यान सभी प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों की विशेष पटसंख्या की जांच की गई थी. जिसमे राज्य के 1 लाख 887 स्कूलों में 20 लाख 70 हजार 520 विद्यार्थी गैरहाजिर थे. अनुपस्थिति का यह प्रमाण 10.16 प्रतिशत था. राज्य में 9 हजार 687 स्कूलों में 20 से लेकर 49. 99 प्रतिशत विद्यार्थी एब्सेंट थे, तो वहीं 2 हजार 659 स्कूलों में 50 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों की अनुपस्थिति दिखाई दी थी. पटसंख्या के अभाव में राज्य की अनेक शिक्षक अतिरक्त हो चुके थे. जिसके कारण सरकार ने 20 जून 2014 के शासन निर्णयनुसार स्थानिक स्वराज संस्था, निजी अनुदानित, अंशत अनुदानित, गैर अनुदानित प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पद भर्ती पर पाबंदी उठाई थी. लेकिन पदभरती में मान्यता देने से पहले कुछ शर्तें रखी गई थीं.

    जिसमें जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में समिति द्वारा पदभरती की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य किया गया था. कुछ शिक्षा संस्थाओं ने विज्ञापन को महत्व न देते हुए सीधे शिक्षकों की नियुक्ति की है. ऐसे राज्यभर में कुल चार हजार शिक्षक, तो वहीं जिले में 200 शिक्षक निजी स्कूलों में नियुक्त किए गए हैं. संस्थाचालकों ने इन्हें नियुक्ति दी हैं, लेकिन शिक्षा विभाग ने इन्हें मान्यता नहीं दी है. लेकिन अब ‘पवित्र ” भर्ती प्रक्रिया होने से 2012 के बाद संस्थाओं द्वारा नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर अब खतरा मंडराने लगा है.

    शिक्षकों की भर्ती बिना विज्ञापन दिए और अनुमति लिए अतिरिक्त शिक्षकों का समायोजन खतरों भरा साबित होगा. 2014 के शासन निर्णय का स्पष्ट उल्लेख कर चेतावनी दी जा रही है कि शिक्षा संस्थाओं की लगातार की गई नियुक्तियों को मान्यता न दें. पदभरती के लिए मान्यता कार्रवाई में विलंब न करते हुए नियुक्त किए गए शिक्षकों को कार्योत्तर मान्यता देने के लिए शिक्षणाधिकारी जिम्मेदार होंगे. जिसके कारण कार्योत्तर मान्यता की कुछ फाइलें शिक्षणाधिकारियो सम्बंधित शिक्षा संस्थाओ के पास इससे पहले वापस भेज दी है.


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