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    Published On : Sat, Jun 30th, 2018

    पीकेवी प्रशासन को पता ही नहीं उनके तेलंगखेडी बग़ीचे में शुरू है निर्माणकार्य !

    नागपुर – राज्य सरकार पीकेवी विद्यापीठ (पंजाब राव कृषि विद्यापीठ) को कृषि क्षेत्र में प्रगति करने के लिहाज़ के लिए राज्य के विभिन्न ठिकानों पर ज़मीन मुहैय्या कराती है. शहर में भी पीकेवी को बेशक़ीमती जगह मिली हुई है. लेकिन विद्यापीठ प्रबंधन आय के साधन जुटाने के उद्देश्य के आगे मानों कुछ विचार करने के लिए राज़ी नहीं. ऐसा ही एक मामला नागपुर शहर के तेलंग खेड़ी बगीचे से संबंधित प्रकाश में आया है. जहां पिछले २ सप्ताह से बगीचे में होटल/कैफेटेरिया तैयार करने के लिए निर्माणकार्य शुरू है.

    निसर्ग प्रेमियों के अनुसा

    र बगीचे का दिनोंदिन व्यवसायीकरण किए जाने के साथ ही निसर्ग के साथ खिलवाड़ करने का क्रम लगातार शुरू है. इसकी शिकायत भी विद्यापीठ प्रबंधन से की गई, लेकिन प्रबंधन को इस निर्माण कार्य की कोई जानकारी ही नहीं होने की बात सामने आई. इसके बाद जब निसर्गप्रेमियों ने मामले की और तह ली तो पता चला कि ठेकेदार ने अवैध रूप से किसी को किराये पर देने का सौदा कर लिया है. इस अवैध साठगांठ के कारण पक्का निर्माणकार्य शुरू है.

    कुदरत की गोद में बसे इस बग़ीचे में सुबह और शाम लोग घूमने आते हैं. यहां योग से लेकर मॉर्निंग वॉक तक करते हैं. लेकिन विगत कुछ वर्षों में इस बगीचे को लॉन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां कई सफेदपोशों ने अपने घर के कार्यक्रम विद्यापीठ प्रबंधन से समझौता कर निपटा लिया. ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से पैसे कमाने का मकसद लेकर शहर के एक व्यापारी की नजर पड़ी. उसने समूह बनाकर उद्यान संचलन को ठेका पर लेने के लिए सफेदपोशों की मदद ली और उसे हासिल भी कर लिया. इसके बाद बग़ीचे में प्राइवेट पार्टियों के आयोजन के लिए लाखों रुपए की डील की जाने लगी. ऐसे आयोजनों के लिए ठेकेदार कभी कभी पीकेवी को भी नजर अंदाज कर जाता और मोटी रकम अंदर हो जाती. शातिर ठेकेदार समय पड़ने पर मुख्यमंत्री का करीबी होने का दावा भी बेझिझक कर देता.

    लिहाजा अब उक्त निसर्गप्रेमियों ने विद्यापीठ प्रबंधन और मुख्यमंत्री से मांग की है कि तेलंगखेड़ी बगीचे के साथ शहर के अन्य सभी बगीचों का निजीकरण रोका जाए. अन्यथा न्यायालय की शरण में जाकर निसर्ग बचाव के लिए पहल करने के लिए क़दम उठाने पर उन्हें मजबूर होना पड़ेगा.

    – राजीव रंजन कुशवाहा


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