Published On : Sat, Jul 6th, 2019

पदोन्नती के आदेशों को अदालत में चुनौती देने पहुंचे नासुप्र के अधीक्षक अभियंता गुज्जेलवार

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नगर विकास विभाग व प्रन्यास सभापति को नोटिस जारी

नागपुर : प्रन्यास के विश्वस्त मंडल में मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नति पर मुहर लगाए जाने के बावजूद सरकार के आदेशों पर प्रन्यास सभापति द्वारा पदोन्नति का प्रस्ताव खारिज कर अधीक्षक अभियंता बनाए जाने को चुनौती देते हुए सुनील गुज्जेलवार की ओर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. सुनवाई के बाद न्यायाधीश रवि देशपांडे और न्यायाधीश विनय जोशी ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग और प्रन्यास सभापति को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने के आदेश दिए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. तुषार मंडलेकर, प्रन्यास की ओर से अधि. गिरीश कुंटे और राज्य सरकार की ओर से अधि. मेहता ने पैरवी की.

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ज्ञात हो कि याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधि. मंडलेकर ने कहा कि याचिकाकर्ता गत 30 वर्षों से प्रन्यास में कार्यरत है. कार्यकाल में उनका रेकार्ड बेदाग रहा है. इसे देखते हुए 21 जनवरी 2016 को प्रमोशन कमेटी द्वारा प्रस्तावित करने के बाद विश्वस्त मंडल की बैठक में मुख्य अभियंता के रूप में मुहर लगाई गई. संविधान की धारा 309 के अनुसार राज्य सरकार की ओर से मुख्य अभियंता के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार याचिकाकर्ता ही इस पद के अकेले दावेदार थे. प्रन्यास में मुख्य अभियंता के पद को राज्य सरकार की ओर से 14 दिसंबर 2015 को मंजूरी प्रदान की गई थी. यहां तक कि सभापति को यह पद भरने के निर्देश भी जारी किए गए थे, जिसके बाद नियमों के अनुसार पद भरने की प्रक्रिया पूरी की गई. पीडब्ल्यूडी में मुख्य अभियंता के पद पर नियुक्ति के नियमों के अनुसार याचिकाकर्ता को पदोन्नति दी गई.

उल्लेखनीय यह हैं कि याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि विश्वस्त मंडल की मुहर के बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा गया, लेकिन राज्य सरकार ने प्रस्ताव को मंजूर करने से इंकार कर दिया. निर्देशों के अनुसार प्रन्यास सभापति ने भी दी गई पदोन्नति को खारिज कर दिया. साथ ही उन्हें सुनवाई का मौका दिए बिना ही अधीक्षक अभियंता के पद पर डिमोट कर दिया गया. डिमोशन के लिए दिए गए आदेश में मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नति के लिए सर्विस रूल नहीं होने का कारण दिया गया.

याचिकाकर्ता के अनुसार 9 मई 2017 को राज्य सरकार ने प्रन्यास बर्खास्त करने का निर्णय लिया. साथ ही 1 जून 2017 को विभिन्न पदों पर पदोन्नति देने के लिए ड्राफ्ट सर्विस रूल्स भी निर्धारित किए. एनआईटी एक्ट-1936 की धारा 89 के तहत सेवा नियम निर्धारित किए गए. जिसे राज्य सरकार की ओर से 3 जून 2019 को अंतिम किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि प्रन्यास की अधिकारी सुनीता अलोनी को इसी संदर्भ में हाईकोर्ट की ओर से राहत प्रदान की गई है. जिसे इसी दिन टाउन प्लानिंग के उपसंचालक के पद पर पदोन्नत किया गया और बाद में डिमोशन किया गया था. हाईकोर्ट ने इस मामले में डिमोशन के आदेश को खारिज किया है. इसी आधार पर राहत देने का अनुरोध भी किया गया.

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