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    Published On : Sat, Feb 13th, 2021

    अधीक्षक अभियंता तालेवार ने उपस्थितों को किया गुमराह

    – नोटिंग का आदेश था और किया जा रहा बड़े-बड़े फाइलों का पुनर्निरीक्षण

    नागपुर : मनपा के विवादास्पद अधिकारी मनोज तालेवार शुरुआत से ही विवादों में घिरे रहना उनका एक व्यक्तिगत शौक सा हो गया हैं.फ़िलहाल वे सीसी रोड फेज-2 के टेंडर सह भुगतान घोटाले के प्रमुख आरोपियों में से एक हैं,इसके बाद भी नए-नए कारनामें करने से बाज़ नहीं आते.कल शुक्रवार की दोपहर ठेकेदारों की समस्याओं को लेकर महापौर दयाशंकर तिवारी ने एक बैठक आयोजित की थी,जिसमें ठेकेदारों के आरोपों से मुकरते हुए महापौर को गुमराहपूर्ण जानकारी दी.तालेवार के इस जवाब से सभी हक्के-बक्के रह गए.

    बैठक के दौरान ठेकेदारों ने जानकारी दी कि TENDER WORK पूर्ण होने के बाद फाइलें सम्बंधित कार्यकारी अभियंता के पास से अधीक्षक अभियंता कार्यालय में नोटिंग के लिए भेजा जाता हैं,इसके बाद सीधे भुगतान के लिए वित्त विभाग भेज दिया जाना चाहिए।पहले सम्बंधित कार्यकारी अभियंता के पास से सीधे वित्त विभाग भेज दिया जाता था.जनवरी 2020 के अंत में मनपा नागपुर में नए व विवादास्पद आयुक्त तुकाराम मुंढे ने जिम्मेदारी सँभालने के बाद वित्त विभाग में भुगतान पूर्व जाने से पहले अधीक्षक अभियंता कार्यालय में NOTING के लिए नया आदेश जारी किया था ,तब से यह प्रथा शुरू हुई.

    इसका गैर फायदा भी तभी से होना शुरू हो गया.तालेवार के निर्देश पर हैरी-पोर्टर ( हरी और उइके) सक्रीय हो गए.नियमानुसार हरि को नोटिंग कर फाइलों को वित्त विभाग भेज देना चाहिए था लेकिन तालेवार बड़े-बड़े फाइलों को या तो लैब में भेजना शुरू किया या फिर उनका पुनर्निरीक्षण किया जाने लगा.लैब का प्रमुख याने तालेवार का उपअभियंता उइके हैं.याने इस तिकड़ी के करतूतों से अमूमन सभी ठेकेदार परेशान हैं.इसकी जानकारी ठेकेदारों ने बैठक में उपस्थितों के मध्य दी तो तालेवार सीधे मुकर गए कि कोई पुनर्निरीक्षण नहीं की जा रही.

    बैठक में एक ठेकेदार ने वित्त विभाग द्वारा नियमित भुगतान न किये जाने का आरोप वित्त अधिकारी पर मढ़ा तो इसके जवाब में वित्त अधिकारी ने महापौर को जानकारी दी कि जब से उन्होंने मनपा में JOIN( नवंबर के पहले सप्ताह में ) किया,अर्थात पिछले 3 माह में 160 करोड़ रूपए का भुगतान कर चुके हैं.वित्त अधिकारी के इस जवाब से सभी सकते में आ गए.

    गंभीर सवाल यह हैं कि उक्त दोनों मामलों के पीछे कोई न कोई बड़ा नाम सक्रिय हैं.तालेवार उनका करीबी होने से उसे तीनों आयुक्त ने घेरने के बावजूद उसे घर बैठाने में सफल नहीं हो पाए.ऐसे अधिकारी को मनपा की प्रभारी CE भी संरक्षण दे रही क्यूंकि सीसी रोड फेज-2 के टेंडर सह भुगतान घोटाले में CE की करीबी ठेकेदार कंपनी पर कार्रवाई होनी हैं,इसलिए तालेवार बचता जा रहा.CE ने तालेवार पर कार्रवाई की तो इसका सीधा असर उनके करीबी ठेकेदार कंपनी डीसी ग़ुरबक्षाणी और अश्विनी इंफ़्रा को BLACKLIST करना पड़ेगा। इस चक्कर में आयुक्त द्वारा गठित जाँच समिति ठंडे बस्ते में चली गई,अर्थात CE की वजह से आयुक्त के कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठनी शुरू हो गई.

    तो दूसरी ओर बैठक में वित्त अधिकारी पर उंगली उठाने वाले शुरुआत से ही वित्त अधिकारी पर हमला बोल रहे,ऐसा लगता हैं कि इनके पीछे भी वहीं बड़ा नाम सक्रिय हैं जो इन विभाग प्रमुखों पर नकेल कस अपना उल्लू सीधा करना चाह रहा.इनके ऐसे करतूतों से महापौर तो अप्रत्यक्ष रूप से अड़चन देने की कोशिश,ऐसा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।क्यूंकि इस बड़े नाम के अटर्नी को मुंढे से तबियत से सबक सिखाया था ,जिसकी चर्चा आज भी बड़े चाव से मनपा मुख्यालय में हो रही हैं.


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