Published On : Sat, Sep 21st, 2019

स्मार्ट सिटी प्रकल्प कागजी हीरो

स्थापित सीसीटीवी,वाईफाई जोन,कीओस्क व उसके शुरू होने की जानकारियां देने में कर रहे आनाकानी

नागपुर – शहर की स्मार्ट सिटी प्रकल्प शुरुआत से ही विवादों में रही,इसमें घी डालने का काम प्रकल्प के असक्षम अधिकारी कर रहे हैं। वे मनपा पदाधिकारी,नगरसेवक व जनता की मांग को सिरे से ठुकरा रहे,अर्थात प्रकल्प कागजों तक सिमित होने का आभास हो रहा। जमीनी हकीकत से कोसों दूर नागपुर की स्मार्ट सिटी प्रकल्प ने कागजों पर प्रकल्प की सफल रचना कर कई पुरस्कार अपने नाम कर चुकी लेकिन जमीन पर प्रकल्प का वजूद दिखाई नहीं दे रहा।

स्मार्ट सिटी के तहत आज भी पूर्व नागपुर में रोष हैं, प्रकल्पग्रस्तों को आज तक समाधानकारक न्याय नहीं मिला।इसलिए प्रकल्प की जमीनी कामकाज शुरू करने में विलंब हो रही हैं।
सीसीटीवी लगाने का मामला में भी पारदर्शी नहीं हैं।शहर की जरूरतानुसार सीसीटीवी नहीं लगाई गई। वाईफाई ज़ोन का काम भी अधर पर हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी/सुविधाओं से लैस कीओस्क लगाने में मनपा पदाधिकारी/नगरसेवक/नागरिकों की मांग को कचरे की टोकरी में सिरे से डाल दिया गया। इस संबंध में प्रकल्प के महाप्रबंधक उदय घिये के अनुसार ने बताया कि जगह मिली नहीं इसलिए कहीं भी और कहीं-कहीं 2-2 लगा दिया गया। इसमें से सभी शुरू करने का दावा कर रहे,लेकिन हकीकत यह हैं कि आधे से ज्यादा बंद हैं या फिर उपयोग में नहीं हैं।

परिवहन सभापति के निर्देश पर कोराडी रोड स्थित रजत हाइट के सामने भरपूर जगह होने के बावजूद कीओस्क लगाने में आनाकानी कर रहे,माँगकर्ता से आसपास सरकारी कार्यालय परिसर ढूंढने की मांग इनकी प्रकल्प को लेकर गंभीरता प्रदर्शित कर रही। घिये से प्रकल्प के अधिकारी व कर्मचारियों भी कामकाज को लेकर काफी नाराज हैं, बताया जा रहा कि प्रकल्प के मुखिया के वरदहस्त से टीके हुए,प्रकल्प का वातावरण वर्तमान में अस्वस्थ्य हैं।

उल्लेखनीय यह हैं कि प्रकल्प पूर्ण करने हेतु सैकड़ों करोड़ प्राप्त हुए,इसका बड़ा हिस्सा मासिक सिर्फ और सिर्फ मोटी वेतन देने में खर्च हो रहा। प्रकल्प ठीक से शुरू ही नहीं हुआ और अनाप-सनाप भर्ती कर लालन-पालन किया जा रहा। लगता हैं स्मार्ट सिटी का हाल गोसिखुर्द प्रकल्प सा होने के आसार नजर आ रहा हैं।