Published On : Fri, Nov 15th, 2019

घर तोड़े जाने के कारण ठंड में छोटे बच्चे, महिलाये सड़क पर रहने को हुए मजबूर

नागपुर– ठंड शुरू हो चुकी है और ऐसे में किसी से कहा जाए की खुले आसमान और बिना छत के सड़क के किनारे रात गुजारो तो ऐसा केवल वही कर सकते है जो मजबूर है या फिर जिनके पास घर नहीं है. लेकिन यह मज़बूरी गिरिनगर के गरीब नागरिकों पर आन पड़ी है. करीब 8 दिन पहले यहां के 50 से 60 घरों को हाईटेंशन वायर के नीचे आने की वजह से इनके घरों को तोड़ दिया गया था. जिसके कारण यह गरीब लोग पिछले आठ दिनों से अपने छोटे छोटे मासूम बच्चों के साथ खुले आसमान के निचे सड़क पर दिन और रात गुजार रहे है.

लेकिन इन लोगों पर न तो प्रशासन की नजर पड़ रही है और नहीं सबका विकास चाहनेवाली सरकारी की. इस परिसर के उजड़ जाने के बाद सड़क के किनारे महिलाएं परेशान होकर अपने बच्चों के साथ बैठी है और अपने घरो को देख रही है. तो वही छोटे बच्चों को यह तक नहीं पता की उनका घर क्यों तोड़ा गया और इसमें उनकी क्या गलती है. इन लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने नाराजगी और बेबसी के साथ बताया की करीब पिछले 30 सालों से वे यहां रह रहे थे. अभी तक किसी को कोई भी तकलीफ नहीं हुई.

कुछ दिन पहले धंतोली झोन से यहां के कुछ घरों को नोटिस आया था. जिसके बाद हमारा पुनर्वसन किए बिना ही हमारे घरों को तोड़ दिया गया. हमें अपना सामान समेटने के लिए भी समय नहीं दिया गया. यह लोग अब सड़क पर अपना खाना बना रहे है और बच्चे सड़क पर खेल रहे है. लेकिन इनकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है.

पिया विष्णुपाल अपने छोटे बच्चे के साथ यहां रहती है. उसका कहना है की वे करीब 30 साल से यहां रह रही है. आठ दिन पहले हमारे घर तोड़े गए. तभी से हम लोग काम पर नहीं जा रहे है. हमारे घर तोड़े जाने की वजह से हम बेघर हो चुके है. ऐसे हालात में हम इन छोटे छोटे बच्चो को लेकर कहा जाएंगे.

13 साल का चेतन भी अपना घर तोड़े जाने की वजह से 8 दिनों से स्कुल नहीं जा पाया. वह और उसके माता पिता भी काफी परेशान है. चेतन ने बताया की वह 9वी क्लास में है. लेकिन अब वह घर नहीं होने की वजह से पढ़ाई भी नहीं कर पा रहा है और ना ही स्कुल जा पाया है.

यहां रहनेवाले विशाल नेवारे का कहना है की आठ दिनों से वे काम पर नहीं जा पाए है. उन्होंने बताया की उनसे कहा गया था की जब तक उनका पुनर्वसन नहीं किया जाएगा तब तक उनके घर नहीं तोड़े जाएंगे. बावजूद इसके उनके घर तोड़ दिए गए.

नारायण वानखड़े और बंडू रंगारी की भी यही परेशानी है. वे भी आठ दिनों से काम पर नहीं गए है. वे अभी बच्चों को लेकर काफी चिंतित दिखाई दिए. परिसर में जिनके भी घर टूटे है उनकी सभी की परेशानिया लगभग एक जैसी ही है.