Published On : Fri, Jun 21st, 2019

श्री आयुर्वेद महाविद्यालय में चल रहे निजी डेंटल क्लिनिक में हो रही है मरीजों की आर्थिक लूट

नागपुर- शहर में कई सरकारी, निजी और ट्रस्ट के हॉस्पिटल है. जो गरीब तबके के लोग है वे सरकारी हॉस्पिटल या फिर ट्रस्ट के हॉस्पिटल में जाते है. ट्रस्ट के हॉस्पिटल में निजी हॉस्पिटल से कम पैसो में मरीजों का इलाज होता है. लेकिन शहर के ही क्रीड़ा चौक में स्थित श्री आयुर्वेद महाविद्यालय में गरीब मरीजों को भी काफी पैसे देने पड़ रहे है. यह ट्रस्ट का हॉस्पिटल है यह सोचकर जब मरीज यहां पहुँचता है तो यहां पर निजी हॉस्पिटल जैसा चार्ज करने की बात सामने आयी है.

जानकारी के अनुसार इस हॉस्पिटल में डेंटल क्लिनिक भी है. डेंटल क्लिनिक में ही अपना इलाज कराने वाले एक मरीज ने जानकारी देते हुए बताया की ट्रस्ट के हॉस्पिटल में मरीज इसलिए आता है ताकि कम खर्च में उसका इलाज हो सके. लेकिन यहां 10 रुपए रजिस्ट्रेशन देने के बाद मरीज को सम्बंधित डॉक्टरो के पास भेजा जाता है. वे भी यहां आए थे और उन्होंने डॉ से अपना इलाज कराया लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनसे इतना पैसा वसूला जाएगा. उन्होंने बताया की उनके दांतो के इलाज के लिए उन्हें दवाईयां, एक्सरे मिलाकर करीब 15 हजार रुपए खर्च आया. जो निजी हॉस्पिटल के बराबर है.

यहां पर कॉलेज होने के साथ ही यहां हॉस्पिटल भी है. जहां मरीजों का इलाज होता है. ट्रस्ट के नाम पर हॉस्पिटल शुरू है. कम खर्च आएगा यह सोचकर मरीज यहां पहुँचता है. लेकिन उसे इसकी जानकारी नहीं होती. जिसके कारण उसे काफी पैसा यहां पर इलाज करने पर लग जाता है. जानकारी के अनुसार हॉस्पिटल का यह क्लिनिक डॉ.को किराए पर 3 साल पहले दिया गया है और उन्हें बताया गया कि किसी भी मरीज से ज्यादा पैसा न लिया जाए. बावजूद इसके ट्रस्ट के हॉस्पिटल में चल रहे क्लिनिक में रोजाना सैकड़ो मरीजों की लूट हो रही है.

इस बारे में कॉलेज के प्रिंसिपल एम.बी.येवले से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह ट्रस्ट का कॉलेज और हॉस्पिटल है. सरकार की ओर से कॉलेज को अनुदान मिलता है. मैनेजमेंट के द्वारा लिए गए निर्णय से ही डॉ. को किराए पर क्लिनिक दिया गया है. क्लिनिक में लगाए गए सारी मशीनें हॉस्पिटल की है. अगर किसी मरीज से ज्यादा पैसे लिए गए है तो इस मामले को मैनेजमेंट के सामने रखेंगे और डॉ.को क्लिनिक से हटाएंगे. उन्होंने बताया की क्लिनिक किराए से देने के लिए उन्हें मैनेजमेंट की अनुमति लेनी होती है. इसके लिए प्रशासन की अनुमति नहीं ली जाती.