Published On : Sat, Jul 27th, 2019

शिव विश्वास और माता पार्वती श्रद्धा: बालव्यास योगेश कृष्ण

नागपुर: सती आद्या की अवतार हैं. जहां शिव विश्वास है वहीं माता पार्वती श्रद्धा हैं. जीवन में जब भी श्रद्धा और विश्वास का गठजोड़ होता है तो पुरुषार्थ और विवेक की उपलब्धि होती है. कहा गया है जीवन राग द्वेष से दूर रहेगा तभी जीव सुखी होगा. भक्ति के बीज का विनाश कभी नहीं होता. उक्त उद्गार सामूहिक शिवमहापुराण कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव में बाल व्यास योगेश कृष्ण जी महाराज ने व्यक्त किए. ग्रेट नाग रोड, अशोक चैक में शिवपुराण का 30 जुलाई तक जारी है.

उन्होंने सती चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि दक्ष प्रजापति की सभी पुत्रियां गुणवती थीं. फिर भी दक्ष के मन में संतोष नहीं था. वे चाहते थे उनके घर में एक ऐसी पुत्री का जन्म हो जो सर्व शक्ति संपन्न हो व सर्वविजयिनी हो. अतः दक्ष एक ऐसी ही पुत्री के लिए तप करने लगे.

तप करते करते अधिक दिन बीत गए, तो भगवती आद्या ने प्रकट होकर कहा कि मैं तुम्हारे तप से प्रसन्न हूं. माता भगवती ने कहा कि मैं स्वयं पुत्री रूप में तुम्हारे यहां जन्म धारण करूंगी. मेरा नाम सती होगा. फलतः भगवती आद्या ने सती रूप में दक्ष के यहां जन्म लिया. बाल्यावस्था में ही सती ने ऐसे कई अलौकिक आश्चर्यचकित करने वाले कार्य कर दिखाए थे, जिन्हें देखकर स्वयं दक्ष को भी विस्मय होता था.

आज व्यासपीठ का प्रथम पूजन यजमान अनुसूया सुंदरलाल रेवाड़िया, जयंती बबनकुमार रेवाड़िया परिवार, मोरेश्वर भंाडारकर, श्रावण मानकर, अभिषेक कारेमोर, सौरभ भांडारकर, प्रमोद हर्षे, सुधाकर यमदे, अयान भांडारकर, महेश आसटकर, सविता मेंढेकर, संध्या आमदरे, सारिका पोहाने, कमल पोहाने, मुक्ता नांदुरकर, बेबी पोटदुखे, मंदा सहारे, शीलाा घाटोेले, प्रीति आष्टनकर, संगीता आष्टनकर, पुष्पा सोनवाने, मंदा बानोडे, निशा वाघमारे, गीता हिंगणकर, माया वैद्य, रंगू बावनकुले, रेखा आष्टनकर, शोभा घाटोले, राधा सोनवाने, पवन खेड़ीकर सहित अन्य ने किया. कथा का समय दो. 3 से 6 रखा गया है.