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    Published On : Tue, Sep 25th, 2018

    सिक्योरिटी एजेन्सी टेंडर घोटाले के आरोप पर प्रशासन खामोश

    Mayor Nanda Jichkar

    नागपुर: सोमवार को मनपा की आमसभा के प्रश्नोत्तर काल में दस्तावेज और आंकड़ों के साथ जानकारी प्रस्तुत कर भाजपा के ही पार्षद एवं विधि समिति सभापति धर्मपाल मेश्राम ने सिक्योरिटी एजेन्सी के टेंडर आवंटन में भारी भ्रष्टाचार होने का मामला उजागर किया. चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने पर महापौर नंदा जिचकार ने मनपा आयुक्त के माध्यम से 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी दिए.

    पहले दस्तावेजों की जांच नहीं की गई थी, लेकिन धांधली उजागर होते ही तत्कालीन आयुक्त अश्विन मुदगल ने किशोर एजेन्सी और यूनिटी सिक्योरिटी फोर्स को टेंडर से बाहर कर दिया था किंतु अजीबोगरीब तरीके से 17 नवंबर 2016 को आयुक्त ने पुन: निरीक्षण करने के आदेश जारी किए. इस संदर्भ में प्रशासन से जवाब मांगे जाने पर 10 अगस्त 2018 को प्रशासन की ओर से जवाब दिया गया जिसमें टेंडर के दस्तावेज गलत होने पर कार्रवाई करने की जानकारी दी गई जबकि अब सभा के पूर्व दूसरा स्पष्टीकरण देकर सुधारित जवाब दिया गया. इसमें दोनों एजेन्सियों के लेबर लाइसेंस उचित होने एवं एजेन्सियों को क्लीन चिट दी गई है.

    चर्चा के दौरान यूनिटी सिक्योरिटी फोर्स के दस्तावेजों की पोल खोलते हुए उन्होंने बताया कि 2 नवंबर 2016 को श्रम उपायुक्त एस.के. राय ने मनपा को जानकारी भेजी जिसमें एजेन्सी के पास नागपुर संभाग में टेलीकाम स्ट्रक्चर के रखरखाव का लाइसेंस होने का खुलासा किया गया. अब 14 अगस्त 2018 को श्रम उपायुक्त शेलार ने कम्पनी के पास लेबर लाइसेंस होने की जानकारी दी है जबकि 14 नवंबर 2014 को टेंडर खोल दिए गए. इस तरह से यूनिटी, मनपा प्रशासन और शेलार की साठगांठ से भ्रष्टाचार होने का आरोप उन्होंने लगाया.

    किशोर एजेन्सी की पोल खोलते हुए उन्होंने कहा कि इस कम्पनी ने टेंडर के साथ जो लाइसेंस प्रस्तुत किया, वह इस कम्पनी का है ही नहीं. यह लाइसेंस एमएसईडीसीएल के वाशिम सर्कल का है. एजेन्सी का इससे कोई संबंध ही नहीं है. एमएसईडीसीएल की जगह कम्पनी ने केवल अपना नाम लिख दिया है. इस तरह से बड़ी धांधली की गई है, जिससे मामले की पूरी जांच के लिए सत्तापक्ष नेता की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने की मांग उन्होंने की. जांच पूरी होने तक ठेका रद्द करने की मांग भी की.

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