Published On : Tue, Sep 25th, 2018

आस्था से खिलवाड़ : साड़ू माती बनाकर भक्तों को थमाई गईं पीओपी की गणेश प्रतिमाएं

नागपुर: मनपा प्रशासन ने शहर में इस वर्ष इकोफ्रेंडली गणेशोत्सव का ढिंढोरा पीटा था. पीओपी की गणेश प्रतिमाओं की बिक्री के लिए नियम भी तैयार किए थे. कुछ विक्रेताओं के खिलाफ पीओपी की मूर्तियों में लाल निशान नहीं लगाने के चलते कार्रवाई भी की गई थी. बावजूद इसके इस वर्ष शहर में 90 फीसदी गणेश प्रतिमाएं पीओपी की ही बेची गईं. वह भी नागरिकों को बेवकूफ बनाकर. मूर्तिकारों और विक्रेताओं ने खरीदारों को मिट्टी और सांडू मिट्टी की प्रतिमा के नाम पर पीओपी की मूर्ति बेचकर जमकर बेवकूफ बनाया.

मनमाने दाम भी वसूल किए और उनकी आस्थाओं पर चोट पहुंचाते हुए पीओपी की प्रतिमाएं थमा कर भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी किया. उनकी बेईमानी की पोल गणेश विसर्जन के दिन खुली जब शहर भर में लगाए गए कृत्रिम टैंकों, तालाबों व कुंडों में श्रद्धालुजन गणेश विसर्जन को पहुंचे. जैसे ही प्रतिमाएं पानी में डाली गईं वह भीतर जाने की बजाय तैरने लगीं. यह देख श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू तक छलक आए कि मूर्तिकारों व विक्रेताओं द्वारा उन्हें किस कदर आहत किया है. पूरे शहर भर में जितने भी कुंड बने थे सभी में 90 फीसदी प्रतिमाएं पानी में डूबी नहीं बल्कि तैरती रहीं, क्योंकि वे पीओपी की थीं.

चितार ओली से उठा भरोसा
चितार ओली में मू्र्तिकार दशकों से मिट्टी की शुद्ध प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं. उन मूर्तिकारों पर नागरिकों का पूरा भरोसा है लेकिन इस वर्ष तो वह भरोसा भी उठ गया. हजारों लोग ने चितार ओली में सजीं दूकानों व स्थायी मूर्तिकारों से मिट्टी की प्रतिमा के नाम पर मुंहमांगा दाम देकर गणेश प्रतिमा खरीदी व घर ले आए. लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि अधिक पैसे वसूल कर यहां के विक्रेता व मूर्तिकार भी आस्था के साथ खिलवाड़ करेंगे. विसर्जन के दिन जब प्रतिमा पानी में तैरने लगी तो उनका चितार ओली के मूर्तिकारों पर से भी भरोसा उठ गया. कई नागरिकों को विसर्जन कुंडों में इसी तरह की चर्चा करते पाया गया जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं.

मनपा प्रशासन रहा फेल
मनपा प्रशासन पर्यावरण को बचाने के प्रतिबंधित पीओपी की प्रतिमाओं को रोकने में बुरी तरह से असफल रहा. नियम के अनुसार पीओपी प्रतिमाओं पर लाल निशान लगाकर खरीदार को इसकी जानकारी देना चाहिए. केवल चितार ओली में एक बार 19 विक्रेताओं के यहां जांच की गई, दंड वसूली की गई और फिर संबंधित विभाग चुपचाप बैठ गया. पूरे शहर में पीओपी की मूर्तियां सांडू मिट्टी व शुद्ध मिट्टी की बताकर विक्रेताओं ने नागरिकों को जमकर बेवकूफ बनाया.