Published On : Thu, Apr 12th, 2018

चुनावी बॉन्ड में सीक्रेट कोड, किसको मिला चंदा,जान लेगी सरकार


क्विंट नामक वेबसाइट ने खुलासा किया है की राजनीतिक पार्टियां कैसे फंड जुटाती हैं, इस पूरी प्रक्रिया में ‘पारदर्शिता’ लाने के नाम पर इलेक्टोरल बॉन्ड लाया गया था. लेकिन क्या अब हम ऐसी निगरानी में हैं, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया?

इलेक्टोरल बॉन्ड लाने के वक्त ये बताया गया था कि बॉन्‍ड के जरिए कौन किसको चंदा दे रहा है, इसकी जानकारी डोनर के अलावा और किसी को नहीं होगी. हालांकि क्विंट के इंवेस्टिगेशन से पता चलता है कि इलेक्टोरल बॉन्ड में ‘अल्फा-न्युमेरिक नंबर’ छिपे हुए हैं, जिन्‍हें नंगी आंखों से देख पाना मुमकिन नहीं है. लेकिन दावे से उलट, इससे ये पता चलता है कि किसने किसको भुगतान किया है.

दूसरे शब्दों में, एक तरफ कोई ये नहीं जान सकेगा कि किसने किस पार्टी को डोनेट किया है, वहीं ‘बिग ब्रदर’ के पास इस ‘अल्फा-न्युमेरिक नंबर’ के जरिए पूरा ब्योरा होगा. ऐसे में सरकार के पास पूरा डेटा होगा, सिर्फ आपका बैंक अकाउंट ही नहीं, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, राजनीतिक दल के प्रति रुझान जैसे डेटा सरकार के पास होंगे.

लैब रिपोर्ट से हुआ छिपे हुए नंबरों का खुलासा



क्विंट ने इसकी पड़ताल के लिए 1-1 हजार कीमत के दो इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे. बॉन्ड में कोई छिपा हुआ फीचर या नंबर है या नहीं, इसकी जांच के लिए उसे फॉरेंसिक टेस्ट के लिए भेजा गया. पहला बॉन्ड 5 अप्रैल को खरीदा गया था, जबकि दूसरा बॉन्ड 9 अप्रैल को खरीदा गया.

देश के सबसे प्रतिष्ठित लैब में इसकी जांच कराई गई. लेबोरेटरी रिपोर्ट दिखाती है कि इलेक्टोरल बॉन्ड में अल्फा न्युमेरिक नंबर्स हैं. 5 अप्रैल को जारी किए गए इलेक्टोरल बॉन्ड में छिपा हुआ यूनिक नंबर है- OT 015101, जबकि 9 अप्रैल को जारी किए गए बॉन्ड का यूनिक नंबर है- OT 015102.

लैब रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अल्ट्रा वायलेट लाइट में परीक्षण करने पर ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के दाहिनी ओर ऊपरी किनारे पर’ सीरियल नंबर छिपा हुआ दिखता है. ((visible on the right top corner of the original document showing fluorescence when examined under UV Light))

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