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    Published On : Sun, Sep 9th, 2018

    26 करोड़ के सागवन की अवैध कटाई

    नागपुर: विदर्भ सहित महाराष्ट्र में जंगलों की भरमार है. जंगलों में वन्यजीवों सहित प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है. इसके लिए सैकड़ों वन कर्मी और अधिकारी भी कार्यरत हैं. इसके बावजूद जंगलों में अवैध कटाई का सिलसिला जारी है. इससे न केवल जंगलों का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है. पिछले 6 वर्षों में अवैध कटाई से वन विभाग को 34.56 करोड़ का नुकसान हुआ है.

    महाराष्ट्र सरकार द्वारा हर वर्ष वृक्षारोपण अभियान के तहत जंगलों से लेकर अन्य स्थानों पर करोड़ों पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है. इस दिशा में कदम भी बढ़ाया जा रहा है, लेकिन पेड़ लगाने के बाद उनके संरक्षण सहित देखभाल के लिए कोई ठोस योजना नहीं है. यही वजह है कि हर सत्र में लाखों पेड़ नष्ट हो जाते हैं. जंगलों में केवल वन्य प्राणियों का ही शिकार नहीं होता, बल्कि पेड़ों की अवैध कटाई करने वाला गिरोह भी सक्रिय है. यही वजह है कि हर वर्ष लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं.

    डिमांड ज्यादा होने से पहली पसंद
    जंगलों में वन कर्मियों द्वारा नियमित रूप से गश्त लगाई जाती है. इसके बावजूद पेड़ों की अवैध कटाई पर अंकुश नहीं लग सका है. गिरोह के लिए सागवन के पेड़ सबसे अधिक कमाई देने वाले होते हैं, क्योंकि फर्नीचर की डिमांड सागवन से ही पूरी होती है. आरटीआई एक्टिविस्ट अभय कोलारकर द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है. 2013 से लेकर मार्च 2018 तक राज्य में कुल 2,34,216 सागवन पेड़ों की अवैध कटाई की गई. वहीं कुल पेड़ों की कटाई 5,61,410 रही. यानी कुल पेड़ों की कटाई में सागवन के पेड़ों की संख्या करीब आधी है.

    34.56 करोड़ का कुल नुकसान
    प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय पेड़ों की अवैध कटाई से होने वाले नुकसान को भी आंका गया है. दरअसल यह वन विभाग का राजस्व होता है. इन 6 वर्षों में सागवन के पेडों की अवैध कटाई से विभाग को 25 करोड़ 96 लाख 27 हजार रुपये का नुकसान हुआ जबकि सभी पेड़ों की अवैध कटाई से कुल राजस्व का नुकसान 34 करोड़, 56 लाख 85 हजार रुपये हुआ. बताया जाता है कि सागवन की डिमांड सबसे अधिक है. विदर्भ में जंगल अधिक है. अवैध कटाई करने वाले रातोरात कटाई के माल को ठिकाने लगा देते हैं. हालांकि वन विभाग द्वारा कार्रवाई भी सतत रूप से की जा रही है. इसके बावजूद अवैध कटाई करने वालों के हौसले बुलंद है.

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