Published On : Mon, Sep 23rd, 2019

नियमों को ताक पर रख धरमपेठ शिक्षा संस्था में मुख्याध्यापीका की गई नियुक्ति

नागपुर: धरमपेठ शिक्षा संस्था में अवैध तरीके से प्रिंसिपल की नियुक्ति करने का मामला सामने आया है. जिसमें जानकारी के अनुसार संस्था के अध्यक्ष ने अपनी बहन को लाभ देते हुए विज्ञापन न देते हुए स्कूल में प्रिंसिपल बना दिया. धरमपेठ शिक्षा संस्था के पूर्व अध्यक्ष डॉ.सुधीर सहस्त्रभोजनी ने यह आरोप लगाया और इसकी जानकारी दी. उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की शिक्षक और अन्य पदों के लिए विज्ञापन दिया गया था. लेकिन मुख्याध्यापक के पद के लिए किसी भी तरह का विज्ञापन नहीं दिया गया था. संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट उल्हास औरंगाबादकर ने उनकी चचेरी बहन को मुख्याध्यापक बना दिया.

मुख्याध्यापक का नाम शिवानी कोकार्डेकर है. इनकी नियुक्ति धरमपेठ पब्लिक स्कुल में की गई है. लेकिन इनका वेतन जहां वे पहले थी आर.एस.मुंडले इंग्लिश स्कुल एंड जूनियर कॉलेज से ही किया जा रहा है. जो की पूरी तरह से अवैध है. इसका मुख्य कारण यह है की धरमपेठ पब्लिक स्कुल नई है. इस स्कुल से इतना ज्यादा वेतन मुख्याध्यापक को देना संभव नहीं था. इस कारण यह अवैध निर्णय संस्था अध्यक्ष की ओर से लिया गया है. इसमें ख़ास बात यह है की इस स्कुल के संपूर्ण शिक्षकों का कुल वेतन और अकेली मुख्याध्यपक का वेतन यह एकसमान है.

डॉ.सुधीर सहस्त्रभोजनी ने बताया की धरमपेठ पब्लिक स्कुल में जब वे मुख्याध्यापक है तो उन्हें आर.एस.मुंडले से वेतन क्यों दिया जा रहा है. डॉ. सुधीर ने यह प्रश्न पिछले वर्ष हुई संस्था की आमसभा में उठाया था. उस दौरान अध्यक्ष एडवोकेट उल्हास औरंगाबादकर ने कहा था की हमसे गलती हुई है. मुख्याध्यापक को आर.एस.मुंडले से वेतन देना सही नहीं है.

इसके बाद इनका वेतन आर.एस.मुंडले से नहीं दिया जाएगा. लेकिन बावजूद इसके वेतन मुंडले से ही दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी. उन्होंने कहा की आनेवाले 27 सितम्बर की सभा में वे फिर से यह मुद्दा उठाएंगे.

इस दौरान एडवोकेट उल्हास औरंगाबादकर से इस मामले में बातचीत की गई. तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की नियमो के तहत ही उनको मुख्याध्यापक बनाया गया है. विज्ञापन भी दिया गया था. इस विषय पर क्या निर्णय लिया जाएगा. इसका जवाब 27 सितम्बर की सभा में दिया जाएगा.