Published On : Wed, Feb 12th, 2020

सेवानिवृत्त अधिकारी को मिल रही सरकारी सुविधाएं

– मनपा अस्पताल को रहवासी परिसर में रूपांतरित कर वर्षों से रह नहीं रहे बल्कि अग्निशमन विभाग से संलग्न वाहन व वाहन चालक का लुफ्त उठा रहे

नागपुर : मनपा से सेवानिवृत्त हो चुके अतिरिक्त आयुक्त को आज भी मनपा प्रशासन द्वारा सरकारी सेवा मुहैय्या करवाया जा रहा.जबकि मनपा अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं।इस ग़ैरकृत से मनपा प्रशासन को हो रहे आर्थिक नुकसान के जिम्मेदार अधिकारी पर कानूनन कार्रवाई की मांग मनपा के नए आयुक्त तुकाराम मुंढे से की गई हैं.अब देखना यह हैं कि मुंढे इस मसले को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

याद रहे कि २ दशक पूर्व सदर स्थित गवर्नर कोठी से लगकर मनपा की अस्पताल हुआ करती थी.इस अस्पताल का अस्तित्व समाप्त होते ही इसके एक हिस्से को उक्त पूर्व अतिरिक्त आयुक्त रिजवान सिद्दीकी ने अवैध रूप से डेढ़ दशक पूर्व अपना निवास बना लिया।


मनपा सेवारत थे तो अपने पहुँच के आधार पर उक्त परिसर में कब्ज़ा जमाए हुए थे लेकिन डेढ़-२ वर्ष पूर्व सिद्दीकी सेवानिवृत्त हो गए इसके बावजूद आज तक मनपा परिसर उनके कब्जे में हैं.इतना ही नहीं मनपा अग्निशमन विभाग ने सेवानिवृत्त बाद अपने विभाग की एक वाहन व वाहन चालक द्वारा उन्हें सेवाएं दे रहे.वाहन चालक भी स्थाई हैं,जिसका वेतन ४०००० के आसपास मासिक हैं.पहले इस वाहन चालक को अतिरिक्त समय मनपा में ड्यूटी बजाने पर ‘ओवर टाइम’ मिला करती थी,लेकिन जब से इन्हें सिद्दीकी की सेवा में तैनात किया गया तब से सिद्दीकी की सलाह पर इनका ड्यूटी का समय कम कर दिया गया.इसके अलावा आज भी मनपा से पेन की रिफिल भी पूर्ति की जा रही.

उल्लेखनीय यह हैं कि सिद्दीकी अपने कार्यकाल में काफी विवादित रहे.पिछले डेढ़ दशक से सत्तापक्ष के करीबी रहे.इनके सेवानिवृत्त हुए समयावधि में मनपा में ३-३ आयुक्त बदल चुके लेकिन इस अवैध कृत से उन्हें किसी ने अवगत नहीं करवाया,इसलिए सिद्दीकी सेवानिवृत्त बाद भी मनपा की सेवाओं का लुफ्त उठा रहे.

नए मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे से ‘एम.ओ.डी.आई.’ फाउंडेशन से मांग की हैं कि सेवानिवृत्त अधिकारी सिद्दीकी से सरकारी परिसर मुक्त करवाकर अपने कब्जे में लें,इन्हें पिछले डेढ़ दशक से आपूर्ति की जा रही सरकारी सुविधाएं समाप्त करें,जब से सिद्दीकी इस परिसर में रह रहे तब से इनसे जल और संपत्ति कर वसूले और इसके जिम्मेदार आला अधिकारी पर भी मनपा को आर्थिक नुकसान पहुँचाने के लिए क़ानूनी कार्रवाई करें।