Published On : Mon, Jul 9th, 2018

1 कार्ड पर केवल 5 किलो दे रहे सरकारी अनाज

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नागपुर: शहर के सरकारी अनाज दूकानों में गरीब राशनकार्डधारकों का हक भी मारा जा रहा है. अनेक राशन दूकानदार कार्डधारकों को बेवकूफ बनाकर केवल 5 किलो गेंहूं-चावल टिकाकर ही चलता कर रहे हैं. ऐसा ही मामला दर्शन कालोनी स्थित मिनाक्षी ग्राहक सह.संस्था नामक राशन दूकान में सामने आया है. यहां दूकान संचालक द्वारा एक राशन कार्डधारक को मात्र 5 किलो ही अनाज दे रहा है. ऐसा कर दूकानदार लाखों का घोटाला कर रहा है. वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे पर आखिर अधिकारियों की नज़र कैसे नहीं पडी यह अपने आप में ही एक बड़ा सवाल है. इससे यह संदेह होता है कि गरिबों के साथ हो रही घोकाधडी में अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकता है.

प्रति व्यक्ति देना चाहिए 5 किलो

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भारत सरकार द्वारा स्थापित और राज्य सरकारों के साथ संयुक्त रूप भरात के गरिवों के लिए सब्सिडी वाले खाद्य और गैर खाद्य वस्तुओं का वितरण किया जाता है. भारत सरकार की ओर से राशन दुकानों की माध्यम से गरिब तपके के नागरिकों को दर माह सब्सिडी रेट पर गेहू, चावल, शक्कर और मिट्टी का तेल दिया जाता है. लेकिन कई वर्षों से राशन दुकानदार गरिबों का हक मार अनाज वितरण मै लाखों का घोंटाला कर रहे है.

नागरिकों ने बताया कि राशन कार्ड पर प्राधान्य योजना का ठप्पा और परिवार के सभी व्यक्ती के आधार लिंक होने के बाद भी दुकानदार सिर्फ 5 किलों ही अनाज देता है. जबकी नियमो के अनूसार कार्ड पर जितने भी व्यक्कि का नाम है उस हिसाब से प्रति व्यक्ती को 5 किलो अनाज देने का प्रावधान है.

नहीं दे रहा बायोमेट्रिक पर्ची
इसके अलावा बायोमेट्रिक मशिन पर अंगूठा लगाने पर एक स्लिप दी जाती है, लेकिन अनाज वितरण के बाद दुकानदार कार्डधारकों को स्लिप न देते हुए अपने पास रख लेता है. स्लिप मांगने पर यह हमारे काम की है, ऐसा बताकर भगा देता है. कार्डधारकों ने बताया कि अधिकारियों के रहते हुए भी दुकानदार 5 किलों ही राशन देता है और स्लिप भी नहीं देता.

ग्राहकों के साथ हो रही यह धोकाधडी केवल इस दुकान में ही नहीं बल्कि शहर के 628 राशन दुकानों में चल रही है. नागपुर शहर में कूल 6 झोन आते है और इसी में से एक मेडिकल झोन में करीब 118 राशन की दुकाने कार्यरत है. हर एक दुकानों को कार्डधारकों कि संख्या के अनूसार अनाज दिया जाता है. लेकिन यह अनाज उन गरिब नागरिकों तक न पहुंचते हुए कैटरिन और किराना दुकानदारों को बेच दिया जाता है.

खुले बाजार में बेच रहे
दूकानदार सरकारी अनाज को मोटी कीमतों में खुले बाजार में बेचते है. कई ऐसे मामले पकड़ में भी आए हैं बावजूद इसके विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी अजना की कालाबाजारी अब भी बैखौफ जारी है. कार्डधारकों को अनाज वितरण की सही जानकारी नहीं होने के कारण दुकानदार इसका फायदा उठा रहा है. बताते चले कि राशन प्रणाली का प्रयोग 1940 में बंगाल भुखमरी के बाद से किया जा रहा है.

देश मे 5 लाख से अधिक राशन की दुकाने हैं. राशन कि दुकानों में दो योजनाओं के तहत अनाज वितरण किया जाता है. अंत्योदय अन्न योजना के अनूसार एक कार्ड पर 35 किलों अनाज यानी 2 रूपए प्रति किलों के हिसाब से 15 किलो गेहू और 3 रूपए के हिसाब से 20 किलों चावल दिया जाना अनिवार्य है. वहीं प्राधान्य योजना के मुताबिक कार्ड पर लिखे हुए परिवार के प्रत्येक व्यक्ती को 5 किलों यानी 2 किलों गेहू और 3 किलों चावल का वितरण करना अनिवार्य है. इन योजना का लाभ उठाने के लिए प्रत्येक व्यक्ती का आधार नंबर लिंक होने आवश्यक है.

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