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    Published On : Thu, Jul 19th, 2018

    रामदासपेठ : सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से मरीजों के परिजनों की आफत

    नागपुर: मध्यप्रदेश और विदर्भ के लिए शहर का रामदासपेठ व धंतोली परिसर मेडिकल हब बन गया है. हर दिन हज़ारों की तादाद में मरीज इलाज कराने आते हैं. इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ से भी मरीज आने लगे हैं. इसके अलावा परिसर में अनेक दूकानें भी हैं. पार्किंग की समस्या तो पहले से ही बनी हुई है, साथ ही परिसर में सार्वजनिक शौचालय भी नहीं है. इस वजह से अक्सर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. अस्पतालों में बने शौचालयों में परिजनों के लिए सुविधा नहीं होने से आसपास ही गंदगी फैलाई जाती है.

    PKV की जमीन पर बने शौचालय
    भाजपा नेता अजय पाठक ने बताया कि रामदासपेठ परिसर में सेंट्रल बाजार रोड पर कई अस्पताल हैं जहां दूरदराज से रोज हजारों की तादाद में लोग इलाज के लिए आते हैं. अस्पताल में मरीज के भर्ती रहने पर मरीज के साथ केवल एक ही व्यक्ति को रहने की अनुमति दी जाती है और अन्य परिजनों को अस्पताल के बाहर या गाड़ियों में ही अपना डेरा जमाना पड़ता है, लेकिन अस्पताल के बाहर कहीं भी सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पिछले हिस्से में पंजाबराव देशमुख कृषि विवि की जमीन है, जिसके एक छोटे से हिस्से में शौचालय का निर्माण किया जा सकता है. नागरिकों को हो रही समस्या को गंभीरता से लेते इस परिसर में जल्द से जल्द शौचालय निर्माण करने की मांग पाठक ने प्रशासन से की है.

    वार्ड के शौचालय का करते हैं उपयोग
    पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि वे एमपी के सागर शहर से आए हैं और 2008 से इलाज के लिए नागपुर के चक्कर काट रहे हैं. इतने वर्षों में उन्हें कई बार इस समस्या का सामना करना पड़ा, लेकिन परिसर में कहीं भी आज तक शौचालय नहीं दिखाई दिया. इसलिए कई बार वे मरीज से मिलने के बहाने से अंदर जाते हैं और वार्ड में मरीजों के लिए बनाए गए शौचालय का उपयोग करते हैं.

    बच सकता है होटल का किराया
    अखिलेश रघुवंशी ने बताया कि वे छिंदवाड़ा से परिजन के इलाज के लिए कल से आए हैं. मरीज का इलाज आगे और कितने दिन चलेगा, कुछ नहीं कहा जा सकता है. मरीज के पास 24 घंटे किसी न किसी व्यक्ति को रहना आवश्यक है, इसलिए दवाइयां एवं कुछ अन्य वस्तु लाने के लिए कम से कम 3 लोगों को अस्पताल में रहना जरूरी है. एक व्यक्ति मरीज के साथ रहता है और अस्पताल के बाहर कहीं भी शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण परिजनों को होटल में रहना पड़ता है. यदि अस्पताल में रहने और बाहर के परिसर में शौचालय की व्यवस्था हो जाए तो इलाज के लिए आए लोगों पर होटल के किराए का आर्थिक बोझ कम हो सकता है.

    शौचालय के दरवाजों पर लगा देते हैं ताले
    कुंदन पटेल ने बताया कि अस्पताल में मरीजों के परिवार से इलाज के लिए मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें ठेंगा दिखाया जाता है. लाखों का बिल चुकाने के बाद भी नागरिकों को शौचालय का उपयोग करने तक की सुविधा नहीं मिलती है.

    इतना ही नहीं, अस्पताल के कर्मचारी शौचालय पर ही ताले लगा देते हैं ताकि कोई व्यक्ति अंदर न जा सके. ऐसे में लोग जाएं तो जाएं कहां, इसलिए परिसर में एक सार्वजनिक शौचालय की बेहद आवश्यकता है.

    लेना पड़ता है रिश्तेदारों का सहारा
    कोंढाली से अपने दामाद का इलाज करने आए तुकाराम घागरे का कहना है कि बड़े-बड़े अस्पताल होने के बाद भी मरीज के परिजनों को अंदर बैठने तक की जगह नहीं दी जाती है. 2 दिन से अस्पताल के बाहर बने एक चबूतरे पर या चाय की टपरियों पर दिन भर बैठे रहना पड़ता है और आसपास कहीं भी शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण रिश्तेदारों के घर जाना पड़ता है.

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