Published On : Sat, Mar 24th, 2018

दूसरे विद्यार्थियों के लिए मिसाल बने राहुल बजाज और भक्ति घाटोडे

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Bhakti Ghatode and Rahul Bajaj

नागपुर: परिस्थितिओं पर मात करते हुए एलएलबी के विद्यार्थी राहुल बजाज ने सर्वाधिक 20 मेडल और पुरस्कार हासिल किए हैं. राहुल ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि उन्हें इतने मेडल और पुरस्कार मिलेंगे. राहुल ने बताया कि उन्हें 12वीं के बाद दूसरे शहर लॉ यूनिवर्सिटी जाने के बारे में इसलिए नहीं सोचा क्योकि उन्हें लगता था कि गृहनगर में उन्हें थोड़ी बहुत सुविधा मिलेगी . राहुल कोर्ट में ही प्रैक्टिस करना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने यहां पढ़ने का निर्णय लिया. उनका कहना है कि सेल्फ मोटिवेशन की काफी जरूरत होती है. उन्हें फॅमिली सपोर्ट मिला है. 10वीं में 97 प्रतिशत मार्क्स मिले थे और 12वी में 95 परसेंट मार्क्स मिले थे. बेसिक लैंग्वेज में अच्छा कमांड होने और वाद-विवाद में दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने लॉ करने की ठानी थी.

12 मेडल और पुरस्कार हासिल करनेवाली बिंजानी महिला महाविद्यालय की सायली सुरेंद्र पेशवे का कहना है कि उसे आगे चलकर पत्रकार बनने की इच्छा है. सायली को बीए की परीक्षा में 81. 2 प्रतिशत मार्क्स मिले हैं. तो वहीं 12 मेडल्स और पुरस्कार हासिल करनेवाली शासकीय विज्ञान संस्था की छात्रा रचना प्रकाश कनोजिया ने अपने बारे में बात करते हुए कहा कि परीक्षा से ठीक पहले उनका एक्सीडेंट हुआ था और उसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई से ध्यान नहीं हटाया .ऐसी ही मेहनत करके सफलता को कायम रखने का उद्देश्य है रचना का.

13 मेडल्स और पुरस्कार हासिल करनेवाले सेन्ट्रल इंडिया कॉलेज ऑफ़ लॉ के विद्यार्थी सौरभ शरद त्रिवेदी को अपने पिता के ही तरह न्यायधीश बनना है.सौरभ के पिता गोंदिया जिला न्यायलय में न्यायधीश है. उन्हीं को देखकर सौरभ को प्रेरणा मिली है.

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दृष्टिहिन भक्ति ने कमजोरी पर मात कर तीन मेडल हासिल किए हैं. भक्ति की मां का नाम सुषमा घाटोडे और पिता का नाम धनंजय है. उसे इकोनॉमिक्स में 2 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल मिला है. भक्ति ने अपनी कमी को अपनी ताकत बनाया. भक्ति देख नहीं सकती लेकिन जन्म से वह दृष्टिहीन नहीं थीं. उसे तीन बार कैंसर हुआ है. जब वह 6 महीने की थी तब कैंसर में उसकी एक आंख गई थी और उसके बाद 6 साल की होने पर उसकी आंखे गईं थीं. इसके बावजूद भक्ति पढ़ने में काफी तेज थी. वह 10वीं और 12वी में मेरिट में आई थी. वह एलएडी कॉलेज में पढ़ती है. भक्ति की इस सफलता में उसकी राइटर का भी काफी योगदान है. हिस्लॉप कॉलेज में पढ़नेवाली आदिती पटवर्धन भक्ति की राइटर है. अदिति भक्ति की 3 साल से यानी बीए फर्स्ट ईयर से राइटर रही है. अपनी कामयाबी में भक्ति अपनी राइटर दोस्त का नाम लेना कभी भी नहीं भूलती . भक्ति उन सभी प्रेरणाश्रोत है जो सभी साधन होने के बावजूद भी नहीं पढ़ते हैं.

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