Published On : Thu, Nov 23rd, 2017

राहुल के हत्यारों का नहीं मिला अब तक कोई सुराग

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नागपुर: बुटीबोरी पोलिस थाना अंतर्गत 10 किलोमीटर दूर बोथली गांव के करीब पेटीचूहा क्षेत्र के जंगल में मंगलवार की रात लकड़गंज थाना से अगवा हुए लॉटरी कारोबारी राहुल आग्रेकर का शव मिला था। गुरुवार को उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। कल मेडिकल हस्पताल में इस कारोबारी के जले शव को देखकर परिजन उलझन में आ गए थे। आज सुबह फिर मृतक की मां और अन्य परिजनों ने मेडिकल में शव की शिनाख्त की और शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए। आज दोपहर बाद राहुल का अंतिम संस्कार किया जाएगा। दो दिन पहले अपहृत किए गए कारोबारी का शव तो मिल गया, लेकिन आरोपियों का 48 घंटे बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है।

पुलिस ने कल रात नागपुर सहित मध्यप्रदेश तथा बाहर के जिलों में जगह- जगह अपनी टीमें भेजी हैं। लेकिन सफलता नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी शिकंजे में होंगे। पुलिस सूत्रों के अनुसार दारोडकर चौक से 21 नवंबर की सुबह करीब 8.30 बजे लॉटरी व्यवसायी के युवा बेटे राहुल आग्रेकर के परिजनों को शिनाख्त के लिए मेडिकल हस्पताल में बुलाया गया था। पुलिस का कहना है की डीएनए टेस्ट और पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट आने के बाद रहस्य उजागर हो सकेगा। राहुल का रानी दुर्गावती चौक क्षेत्र के एक गुंडे के साथियों के साथ मिलकर अपहरण किया गया और शव को बुटिबोरी परिसर में जला दिया गया। सूत्रों के अनुसार जयेश को अपहरणकर्ता घमका रहा था, कि उसके साथियो का मूड़ ख़राब हो रहा है, वह कुछ भी कर सकते हैं। अगर पैसे का इंतजाम नहीं हो सका तो वे लोग उसके भाई को जान से मार देंगे। पता चला है कि राहुल के भाई जयेश ने करीब 40 लाख रुपयों का इंतजाम भी कर लिया था। वह अपहरण करनेवालों से अपने भाई के लिए गुहार लगा रहा था। सूत्रों का कहना है कि जयेश अपने भाई की जान बचाने के लिए यह रुपये देने को तैयार हो गया था, लेकिन अपहरण कर्ता एक करोड़ रुपयों की फिरौती की जिद पर अड़े हुए थे। इस ऑडियो रिकार्ड को नागपुर टुडे की स्क्रीन पर दिए गए लिंक पर सुन सकते हैं।

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अपहरण के मामले में जिंदा नहीं बचा कोई
सूत्रों के अनुसार जब भी शहर के किसी थाने में कोई अपहरण का मामला दर्ज हुआ है, तब परिजनों के मन में डर सताने लगता है। उनके डर का कारण यह है कि शहर के थानों में अपहरण के दर्ज मामले का रिकार्ड देखें तो अभी तक का यही रिकार्ड रहा है कि अधिकांश अपहृत अपने परिजनों से दोबारा नहीं मिल सके। इस शहर में अपहरण के कई मामले इसके जीवंत उदाहरण हैं, जैसे कुश कटारिया, युग चांडक, ठकराल व अन्य कई प्रकरण के उदाहरण सामने हैं। कामठी थानांतर्गत अपहृत हुए 10 वर्षीय बालक का अभी तक तो पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया है। हाईटेक नागपुर पुलिस अपहरणकर्ताओं के मामलों को सुलझाने में काफी पिछड़ती नजर आती है। शहर में रिकार्ड रहा है कि जब भी कोई भी अपहरण का प्रकरण दर्ज किया गया है, तब-तब वह जिंदा नहीं बच सका है।

मेडिकल अस्पताल परिसर में पहुंचे कई बड़े लॉटरी कारोबारी
मेडिकल अस्पताल में बूटीबोरी से अधजला शव लाए जाने की खबर मिलते ही शहर के कई बडे लॉटरी कारोबारी मेडिकल अस्पताल परिसर में पहुंचे थे। राहुल आग्रेकर का लॉटरी के कारोबार में अच्छा नाम था। वह नागपुर में जैन लॉटरी नाम से दुकान चलाता था। उसके पिता सुरेश आग्रेकर का इस व्यवसाय में चर्चित नाम है। उनकी लॉटरी की कंपनियों के मालिकों से सीधा संपर्क होने की जानकारी सूत्रों ने दी है। सुरेश आग्रेकर ने जब इस कारोबार को शुरू किया था, तब नागपुर में लॉटरी के व्यवसाय का उदय हो रहा था। इस धंधे की बदौलत कई कारोबारी करोड़ों रुपए की संपति के मालिक बन गए। कुछ लोगों ने इस धंधे को बंद कर टूर्स एण्ड ट्रैवल्स का कारोबार शुरू कर दिया। कहा जाता है कि कुछ लोग इस व्यवसाय से अभी भी जुड़े हैं। राहुल आग्रेकर का परिवार इस व्यवसाय को संचालित कर रहा था। राहुल ने इस व्यवसाय का कारोबार अपने कंधों पर ले लिया था। वह इस व्यवसाय में कई प्रतिस्पर्धियों की आंखों की किरकिरी भी बन गया था।

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