Published On : Wed, Dec 26th, 2018

भक्ति भागवत भजन से संभव : पं. अशोक शास्त्री

नागपुर: भक्ति का संचार इसी जीवन में करना चाहिये। भक्ति भागवत भजन से आती है। जैसे नारद जी का भगवान से सीधा संबंध है ऐसे ही भागवत भक्ति से भी मानव का सीधा संबंध भगवान से हो सकता है। उक्त उद्गार पं. अशोक शास्त्री महाराज ने बड़कस चैक, महल स्थित ‘श्यामकुंज’ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के अवसर पर कहे। रामबल्लभ गट्टानी परिवार के यजमानत्व में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है।

उन्होंने नारद चरित्र के प्रसंग पर कहा कि ‘नार’ शब्द का अर्थ जल है। ये सबको जलदान, ज्ञानदान करने व तर्पण करने में निपुण होने की वजह से नारद कहलाए। अथर्वदेव में भी नारद जी का उल्लेख मिलता है। अविरल भक्ति के प्रतीक व ब्रम्हा जी के मानस पुत्र माने जाने वाले देवर्षि नारद का पुराणों में बारंबार वर्णन आता है। उन्होंने कहा कि कपिल देवहुति संवाद मन व इंद्रियों को वश में करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भगवान चैतनया है भागवत पुराण सत्य है। सब भगवान के अंश रूप है। भगवान आनंद स्वरूप है। यदि आप में अहंकार है तो आप भागवत ग्रहण नहीं कर सकते। जो नम्र होता है वह प्रभु के समीप रहता है।

आज व्यासपीठ का पूजन यजमान मोहन गट्टानी, राजकुमार गट्टानी, मनोज गट्टानी, जगदीश बंग, जगदीश दलाल, हरिओम माहेश्वरी, संजय सारडा, हरीश मंत्री, प्रदीप माहेश्वरी, डा. मुरकुटे, सुनीता काबरा, सुमन लखोटिया, मीना माहेश्वरी, प्रमोद तातेड़, मनोज खेमानी, मनीष बरालिया, केशुभाई बरालिया, डा. अष्लेश मुरकुटे, डा. राजेश मुरकुटे आदि उपस्थित थे। 27 दिसंबर को धु्रव चरित्र, अजामिल उपाख्यान, प्रल्हाद चरित्र व भगवान नरसिंह अवतार प्रसंग होगा। कथा का समय दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक रखा गया है।