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    Published On : Thu, Dec 27th, 2018

    प्रभु तो निर्विकार ब्रम्हस्वरूप हैंः पं. अशोक शास्त्री

    नागपुर: प्रभु तो सर्वशक्ति संपन्न हैं। वे ही अंतःकरण में प्रवेश कर अपने तेज से सोयी हुई वाणी को सजीव करते हैं। वे ही जन्म और मरण के बंधन से छुड़ाने वाले कल्पतरूस्वरूप हैं। वे ही जगत के कारण, अखंड, अनादि, अनंत, आनंदमय, निर्विकार ब्रम्हस्वरूप हैं। प्रभु की शरण में जाने वाले मनुष्य की वे हमेशा रक्षा को तत्पर रहते हैं। इस लिये साधुओं व संतों की शरण में जाएं । प्रभु सिमरन में मन लगाएं। वे तो सकाम जीवों की कामना पूर्ण करने वाले करुणामय प्रभु हैं। उक्त उद्गार पं. अशोक शास्त्रीजी महाराज ने बड़कस चैक, महल स्थित ‘श्यामकुंज’ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के अवसर पर कहे। रामबल्लभ गट्टानी परिवार के यजमानत्व में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है।

    उन्होंने आगे ध्रुव चरित्र प्रसंग पर कहा कि राजा उत्तानपाद की दो रानियां थीं सुनीति और सुरुचि। लेकिन राजा का सुरुचि से अधिक प्रेम था और सुनीति से कम था। सुरुचि के पुत्र का नाम था उत्तम और सुनीति के पुत्र का नाम था ध्रुव। राजा एक दिन उत्तम को गोद में बैठाकर लाड़ कर रहे थे। तभी बालक ध्रुव वहां आ गए। वे भी पिता की गोद में बैठना चाहते थे। परंतु घमंड से भरी सुरुचि ने धु्रव को कटु वचन कह बैठने नहीं दिया।

    सौतेली माता के कठोर वचन सुन बालक धु्रव वहां से चले गए। माता सुनीति उन्हें समझाती है कि भक्त वत्सल श्री हरि का आश्रय ग्रहण करो। अन्य चिंतन छोड़ कर उन्हीं का चिंतन करो। तब बालक ध्रुव वन में जाकर तपस्या करते हैं। श्री हरि अपने भक्त की कठिन तपस्या देखकर प्रसन्न हो उन्होंने ध्रुव को दर्शन और आशीर्वाद दिया। उन्हांेने अजामिल उपाख्यान, प्रल्हाद चरित्र व भगवान नरसिंह अवतार की कथा सुनाई। इस अवसर पर सजीव झांकी की प्रस्तुत की गई।

    आज व्यासपीठ का पूजन यजमान मोहन गट्टानी, राजकुमार गट्टानी, मनोज गट्टानी, डा. विशोधन मुरकुटे, श्याम राठी, राजूसिंग बैस, राजेश शिवहरे, प्रीतिश आमगे, गोपाल देसाई, उदय बल्लाल, प्रीतिश लाड़, डा. राधिका मुरकुटे, संजय भूतड़ा, जयश्री साबू, सुनीता काबरा, सुचिता गट्टानी, अरुण भूतड़ा ,रामनिवास परतानी, जगमोहन अग्रवाल, नितिन जैन आदि उपस्थित थे। 28 दिसंबर को महारास वर्णन, श्री कृष्ण मथुरा गमन, गोपी उद्धव संवाद, रुक्मिणी विवाह प्रसंग होगा। कथा का समय दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक रखा गया है।


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