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    Published On : Thu, Dec 27th, 2018

    भीतर के दुगुर्ण रूपी रावण का वध करोः पंडित मेहताजी

    नागपुर: रूप रावण को तो भगवान श्रीराम ने मार दिया था लेकिन दुर्गुणों के रूप में अरूप रावण हमारे बीच आज भी जिंदा है। हम हर साल रावण के पुतले को जलाते हैं, मारते हैं। परंतु अपने भीतर के दुर्गुण रूपी रावण को मारने का प्रयास नहीं करते। उक्त उद्गार प्रबंधन गुरु पंडित विजय शंकर मेहता ने हिवरी नगर स्थित श्री बड़ी मारवाड़ माहेश्वरी पंचायत भवन में आयोजित श्री राम कथा में लंका काण्ड के प्रसंग पर व्यक्त किए।

    उन्होंने आज रामचरित मानस के छठवें सोपान लंका काण्ड का प्रसंग वर्णित करते हुए कहा कि अपने भीतर के अरूप रावण यानी दुर्गुणों को भी टटोलते रहिये। पुतले को नहीं, हमारे भीतर बैठे जिंदा रावण को मारना होगा तभी शांति प्राप्त होगी। आज के युवाओं को हनुमानजी से सीखना चाहिए कि किस प्रकार देशकाल और परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया जाए। बुराई को समाप्त करना हो तो हनुमानजी बड़े मददगार हैं।

    महाभारत के युद्ध में जो भूमिका श्रीकृष्ण की थी, श्रीराम-रावण के युद्ध में वही हनुमानजी की रही। कई बार अपने पराक्रम से उन्होंने रावण की ओर जाती दिखाई दे रही जीत का मंुह राम जी की ओर मोड़ दिया था इसलिए हनुमानजी को जीवन में उतार लीजिए। आपके सारे दुख-पीड़ा और संताप प्रसन्नता व सफलता में बदल जाएंगे।

    इस अवसर पर प्रमुखता से हरिकिसन झंवर, किसन गोपाल झंवर, कमलकिशोर झंवर, नंदकिशोर झंवर, लालचंद सोमानी, रमेशकुमार सोमानी, अनिल सोमानी, अशोक सोमानी, डाॅ. अरुण सोमानी, डाॅ. कैलाश सोमानी, कमल काबरा, डाॅ. पुनीत झंवर, दीपक झंवर, डाॅ. अभिषेक सोमानी, विजय सोमानी, अजय सोमानी, शैलेष सोमानी, मनीष सोमानी, कपिल सोमानी, हरीष माहेश्वरी, शंकर काबरा, आदित्य बजाज, सुनील बजाज, राजेश बजाज, राघव बजाज, मनोज खेतावत, विनीत झंवर, मधु सारडा, सरिता पसारी, लता मणियार, प्रतिमा काबरा, रेखा बजाज, डाॅ. आरती मोहता, डाॅ. रामानंद सोमानी, अर्पित माहेश्वरी, वंदना अट्टल, अर्चना मंत्री, डाॅ. श्रद्धा मर्दा, एड. अशोक डागा, एड. तृप्ति डागा, अविश अट्टल, घनश्याम पनपालिया, संजय जैन, लल्लूबाबू जैन, महेश नबीरा, डा. योगेश साबू, डा. कला साबू, रामरतन सारडा आदि उपस्थित थे। मंच संचालन सरला सोमानी और द्वारकाप्रसाद बजाज ने किया।

    शुक्रवार, 28 दिसंबर को उत्तर काण्ड की व्याख्या की जाएगी। शुक्रवार को कथा का समय सुबह 9 से 12 बजे रहेगा। इस अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थिति की अपील सोमाणी व झंवर परिवार ने की है।


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