Published On : Wed, Sep 30th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

खुशखबर : पेंच जलाशय में 1 अक्टूबर से दौड़ेगी नई सोलर बोट

24 पर्यटक एक साथ ले सकेंगे जल सफारी का आनंद, अब दो सोलर बोट उपलब्ध
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खुशखबर : पेंच जलाशय में 1 अक्टूबर से दौड़ेगी नई सोलर बोट

नागपुर – नागपुर और आसपास के वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। पेंच व्याघ्र प्रकल्प में पर्यटकों की सुविधा और जंगल सफारी के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए केरल से एक नई सोलर बोट पहुंच गई है। 1 अक्टूबर से पेंच जलाशय में दो सोलर बोट के माध्यम से पर्यटकों को जल सफारी का आनंद मिलेगा।

पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित यह बोट पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बेहद शांत है। इसके संचालन के दौरान इंजन का शोर नहीं होने से जलाशय के आसपास रहने वाले पक्षियों और वन्यजीवों को भी परेशानी नहीं होगी। शांत वातावरण में पानी के बीच से गुजरते हुए जंगल और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।

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Sept 29,2026 - Time 10.30Hrs
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24 सीटर बोट, इंतजार भी होगा कम
नई सोलर बोट में एक साथ 24 पर्यटक बैठ सकते हैं। दो बोट उपलब्ध होने से पर्यटकों की संख्या के अनुरूप सफारी के अधिक विकल्प मिलेंगे और बोट के लिए लंबा इंतजार भी कम होने की उम्मीद है।

दो रूट पर होगी सोलर बोट सफारी
रूट-1 : कोलीतमारा से नांदपुर और वापसी

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दूरी : करीब 10 किलोमीटर (आना-जाना)
समय : लगभग 1 घंटा 30 मिनट
प्रमुख आकर्षण : नांदपुर में प्राचीन वाकाटक साम्राज्य के अवशेष और नांदपुर कुटी
सफारी समय : सुबह 6 से 8, 8.30 से 10.30, 11 से 1, दोपहर 1.30 से 3.30 और शाम 4 से 6 बजे तक।
रूट-2 : कोलीतमारा से कुंवारा भिवसेन और वापसी

दूरी : करीब 28 किलोमीटर (आना-जाना)
समय : लगभग 3 घंटे
प्रमुख आकर्षण : पेंच के घने जंगलों से गुजरते हुए प्राचीन कुंवारा भिवसेन मंदिर तक का सफर
सफारी समय : सुबह 6 से 9, सुबह 10 से दोपहर 1 और दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक।
जंगल, पक्षी और ऐतिहासिक धरोहर का संगम
पेंच की सोलर बोट सफारी में पर्यटकों को प्रकृति के साथ इतिहास और वन्यजीवन का भी अनूठा अनुभव मिलेगा। नांदपुर क्षेत्र में प्राचीन वाकाटक साम्राज्य के अवशेष देखने को मिलेंगे। वहीं पक्षी प्रेमियों के लिए पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक स्टॉर्क, डार्टर, ग्रे हेरॉन, फिश ईगल और किंगफिशर जैसे पक्षियों को देखने का अवसर मिल सकता है।

इसके अलावा जलाशय के आसपास बाघ, गौर (बायसन), चीतल, सांभर सहित पानी पीने के लिए आने वाले अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी।

शांत और पर्यावरण-अनुकूल सफारी
सोलर ऊर्जा से चलने वाली बोट पेंच के संवेदनशील वन क्षेत्र में पर्यटन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बिना इंजन के तेज शोर के जलाशय में सफर करने से पर्यटकों को प्रकृति को करीब से महसूस करने का अवसर मिलेगा। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली दूसरी सोलर बोट के साथ पेंच की जल सफारी का रोमांच और बढ़ने वाला है।

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