Published On : Fri, Nov 17th, 2017

पद्मावती पर बवाल: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मेकर्स को हद में रहने की दी

भंसाली की फिल्म पद्मावती की प्रस्तावित रिलीज डेट नजदीक आते ही विवाद चरम पर पहुंचता जा रहा है. सिनेमाघर जलाने, जान से मारने और हिंसा फैलाने की धमकी दी जा रही है. यूपी सरकार ने भी विवाद को लेकर दावा कि लोगों में गुस्सा है. निकाय चुनाव के मद्देनजर यूपी में फिल्म रिलीज होने से अशांति फैल सकती है. इस बीच मेरठ में एक राजपूत नेता ने संजय लीला भंसाली के खिलाफ फरमान जारी किया. उसने कहा, जो भंसाली का सिर काट कर लाएगा उसे पांच करोड़ इनाम मिलेगा. ये फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज होनी प्रस्तावित है. लेकिन फिल्म के सिनेमाघर पहुंचने में तकनीकी संकट सामने आ रहे हैं.

तो नहीं रिलीज हो पाएगी पद्मावती

फिल्म 1 दिसंबर को नहीं रिलीज हो सकती. कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो अभी तक मेकर्स ने सेंसर के पास फिल्म नहीं भेजी है. नियमों के मुताबिक, रिलीज से 15 दिन पहले फिल्म को सेंसर के पास भेजना होता है. सूत्रों की मानें को फिल्म की पहली कॉपी का काम पूरा नहीं हुआ है. जिस वजह से इसे सेंसर के पास नहीं भेजा जा सका है. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि नियम का पालन हुआ तो फिल्म प्रस्तावित तारीख पर रिलीज नहीं होगी. क्योंकि प्रस्तावित तारीख पर रिलीज के लिए फिल्म भेजने की अवधि खत्म हो गई है. हालांकि कुछ दिन पहले फिल्म के मेकर्स की तरफ से जारी बयान में दावा किया गया था कि फिल्म सेंसर के पास भेज दी गई है.

केंद्रीय मंत्री ने दी हद में रहने की सलाह

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बेहतर होगा अगर फिल्ममेकर्स सीमा में रहें. उन्होंने मेकर्स पर आरोप लगाते हुए कि अभिव्यक्ति की आजादी मूलभूत अधिकार जरूर है लेकिन एक सीमा में रहे तो बेहतर है. गडकरी ने आगे कहा, मेकर्स को सांस्कृतिक संवेदनशीलता बनाए रखने की आवश्यकता है. फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता. लोगों को फिल्म से नाराज होने का अधिकार है. बीजेपी के सीनियर नेता का यह बयान उस समय आया है जब देशभर में फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन उग्र हो रहा है.

वहीं पद्मावती के खिलाफ सड़कों पर उतरे राजपूत राजघरानों के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरुर ने दावा किया कि आज जो ये तथाकथित जाबांज महाराजा एक फिल्मकार के पीछे पड़े हैं और दावा कर रहे हैं कि उनका सम्मान दांव पर लग गया है. यही महाराजा उस समय भाग खड़े हुए थे जब ब्रिटिश शासकों ने उनके मान सम्मान को रौंद दिया था.