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    Published On : Sun, Oct 11th, 2020

    करजघाट,रायवाड़ी,रामडोंगरी में हो रही खुलेआम रेती उत्खनन

    – रोजाना 1000 से अधिक एलपी,टिप्पर,ट्रक,ट्रैक्टर द्वारा की जा रही चोरी कर माँगकर्ताओ को 3500 से 15000 प्रति गाड़ी रेत पहुंचाई जा रही,कोछि घाट में उत्खनन शुरू होने की हैं.

    नागपुर – नागपुर जिलाधिकारी कार्यालय,जिला खनन विभाग के छत्रछाया में सावनेर तहसील के करजघाट,रायवाड़ी,रामडोंगरी के तीनों घाटों रेती का अवैध उत्खनन पूर्ण शबाब पर हैं, ग्रामीण पुलिस भी उक्त अवैध ग़ैरकृत पर मौन होना समझ से परे हैं। इसलिए भी की क्षेत्र के विधायक व राज्य के मंत्री फिलहाल विभिन्न राज्यों के चुनाव और क्योंकि वर्धा जिले के पालकमंत्री हैं, इसलिए वे काफी व्यस्त हैं, इसका फायदा प्रशासन और रेती चोरी में लिप्त सभी मजे काट रहे।

    शनिवार और रविवार को नागपुर टुडे टीम ने सावनेर तहसील के आधा दर्जन रेती घाटों का प्रत्यक्ष मुआयना किया। सर्वप्रथम कोछि घाट पहुंचे,जिला खनन विभाग ने जानकारी दी कि कोछि घाट के निकट नदी किनारे के खेतों में पिछले दिनों भारी वर्षा से नदी की रेत भर गई थी,उसे निकालने के लिए जिन जिन खेत मालिकों या खेत मालिकों से निकालने वालों ने किया करार बाद विभाग को किये निवेदन पर निर्णय लेते हुए जिलाधिकारी कार्यालय ने मिट्टी मिश्रित रेत निकालने की पहली अनुमति दी। जो कि सफेद झूठ साबित हुई,कोछि घाट के निकट के नदी किनारे खेतों की ऊंचाई 25 से फुट कम से कम दिखी,गांव वालों का कहना था कि पिछले दिनों वर्षा से गांव में पानी घुसा था न कि उनके खेतों में रेत। इनका यह भी कहना था कि गांव की अधिकांश जगह कोछि डैम प्रकल्प में चली गई,इसके बदले में गॉंव के पीछे सर्वसुविधा युक्त प्लॉट भी दिए जा चुके हैं।अर्थात बोगस निवेदन और बोगस अनुमति देकर अवैध रेती उत्खनन को जिला प्रशासन बढ़ावा दे रही।

    इसके बाद करजघाट टीम पहुंची,अमूमन सभी रेती घाट तक पहुंचने के लिए 3 से 4 रास्ते हैं, इन सभी रास्तों के तिराहों-चौराहों पर रेत चोरी करने वालों के मुखबीर बैठे दिखे,जो खतरा भांपते ही घाट पर सक्रिय को चौकन्ना कर देते और जबतक कोई घाट तक पहुंचता सबकुछ साफ हो जाता। करजघाट मार्ग पर जेसीबी,पोकलेन और ट्रक-ट्रैक्टर-टिप्पर दिखे।

    इसके बाद टीम रायवाड़ी पहुंची,जहां 2 पोकलेन नहीं में रेती उत्खनन करती और 2 जो रात में उत्खनन कर चुकी,उसके लोग सह मशीन आराम फरमाते मिली। इसके बाद टीम रामडोंगरी की तीनों घाट का मुआयना किए,जहां जेसीबी,ट्रैक्टर का मेला दिखा,इसके अलावा 5-6 दर्जन मजदूर जो हाथों से ट्रैक्टर में रेती भर रहे थे,जहां से 300 से 400 ट्रैक्टर रोजाना रेती का अवैध परिवहन कर रहा।

    करजघाट से रोजाना 400 ट्रक/टिप्पर की ढुलाई
    इस घाट से रोजाना 400 के आसपास 10 से 15 हज़ार रुपये के हिसाब से टिप्पर और 3500 के हिसाब से ट्रैक्टर रेती बेची जा रही,इस गांव के चौराहे पर पुलिस कर्मी भी रेती की गाड़ियों के निकट दिखे।खापा मंडी और पतिरामवाड़ी बस स्थानक के पास चोरी की रेत उत्खनन करने वाले और परिवहन करने वाले दिखाए गए।राजेन्द्र हाई स्कूल चौक पर रेती चोरों का जमावड़ा रहता हैं। मध्यप्रदेश के मालेगांव की रेती खापा रोड से नागपुर व अन्य जगह भेजी जाती,इसी मार्ग से टेम्बूरडोह,रायवाड़ी की अवैध रेती ओवरलोड परिवहन करते दिखी।

    50-50 फार्मूला का खुलेआम चलाया जा रहा धंधा
    अवैध रेती उत्खनन करने वाले और उसका ओवरलोड परिवहन करने वाले सरकारी मशीनरी और रंगदारों से सुरक्षा का जिम्मा लेने वालों को रोजाना की कुल कमाई का तय आधा हिस्सा देना पड़ता हैं, व्यवहार सह हिसाब किताब साप्ताहिक होता हैं।यह अवैध व्यवसाय से रोजाना लाखों की कमाई दोनों पक्ष कर रहे। प्रशासन अर्थात जिलाधिकारी कार्यालय,जिला खनन विभाग,तहसीलदार,रेवेन्यू इंस्पेक्टर,पटवारी,ग्रामीण पुलिस,हाईवे पुलिस,यातायात पुलिस,स्थानीय थाना और आरटीओ का हिस्सा जिम्मेदारी लेने वालों के मार्फत किसी को साप्ताहिक तो किसी को मासिक पहुंचाया जाता,इसके एवज में उन्हें चुप्पी साधने के निर्देश भी दिया गया हैं।


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