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    Published On : Thu, May 17th, 2018

    आयुक्त से उपायुक्त तक एक भी स्थाई मनपा का मूल अधिकारी नहीं

    NMC Nagpur

    नागपुर: नागपुर महानगरपालिका में प्रशासकीय स्तर पर बाहरी बनाम मनपा के मूल अधिकारों के दरम्यान वर्षों से द्वन्द जारी है. जिसका भरपूर फायदा सिर्फ एकजुट वार्ड अधिकारी या फिर मनपा से ही सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मी उठा रहे हैं. नतीजा मनपा के मूल कर्मियों का मनोबल टूटता जा रहा है और इसका असर उन्हें दिन-दैनिक कार्यों पर आसानी से देखा जा रहा है.

    मनपा आयुक्त वीरेंद्र सिंह, मनपा अतिरिक्त आयुक्त रविंद्र कुंभारे, ४ में से ३ उपायुक्त डांडेगावकर, मोहिते, देवतले सहित प्रभारी लेखा व वित्त अधिकारी मोना ठाकुर बाहरी हैं. जबकि २ बाहरी और २ मनपा के मूल पदोन्नत कर्मी को उपायुक्त बनाया जाना चाहिए था. आज सिर्फ पिछले ३ वर्ष से एक उपायुक्त रंजना लाडे मनपा का मूल कर्मी जरूर है लेकिन वह भी अतिरिक्त कार्यभार संभाले हुए है.

    मनपा में वर्ष २००६ से मनपा कोटे का उपायुक्त पद रिक्त है. तब से आज तक स्थाई रूप से किसी भी मनपा के मूल कर्मी को पदोन्नत कर नियुक्त नहीं किया गया. इस वजह से वरिष्ठ कर्मियों का अधिकार हनन हो रहा है. अगर वर्ष २००६ के बाद मनपा के मूल कर्मियों को वरिष्ठता के आधार पर तब पदोन्नति दी गई होती तो आज इस वक़्त दूसरी पदोन्नति का समय आ गया होता.

    इसी बीच बाहरी अधिकारियों से मिलीभगत कर मनपा में शक्तिशाली वार्ड अधिकारियों के गुट ने एजुटता का परिचय देकर वार्ड अधिकारी से पदोन्नत की श्रेणी में खुद को शामिल करवाए जाने की जानकारी मिली हैं. इस प्रस्ताव को संभवतः मंजूरी भी मिल चुकी. इसके बाद पुनः एक वरिष्ठता सूची तैयार की गई जिसमें वार्ड अधिकारियों को मूल अधिकारियों-कर्मियों से भी वरिष्ठ दर्शाया गया. इस बिनाह पर जब पदोन्नत करने की बारी आएंगी तब प्रशासन और पदाधिकारी नए वरिष्ठता सूची के हिसाब से पदोन्नति हेतु सिफारिश करेंगे. जबकि वार्ड अधिकारियों की नियुक्ति के वक़्त यह साफ़ उल्लेख किया गया था कि वे और उनका कार्यकाल ज़ोन तक इसी पद ( बिना पदोन्नति ) तक सिमित रहेगा. उक्त सोची-समझी हेराफेरी में बाहरी अधिकारियों की अहम् भूमिका और पदाधिकारियों की अनभिज्ञता से मनपा के मूल कर्मियों का हौसला पस्त हो गया है. इनमें से कुछ ने स्वेच्छा सेवानिवृत्त हेतु अपील की और कुछ करने की योजना बना रहे हैं.

    इसके अलावा मनपा में जब भी उपायुक्त से नीचे स्तर के मूल कर्मियों में से पदोन्नत देने की बारी आई, तब-तब राजनैतिक दबाव के साथ लेन देन कर अनुभवहीनों ( गायकवाड़,तालेवार) को महत्वपूर्ण पदों पर आसीन किया गया.

    मलाई खा रहे सेवानिवृत्त, परेशान पदाधिकारी
    पदाधिकारियों की गलती से गडकरी का सपना चूर-चूर होता जा रहा है. मनपा में नए-नए अनुभवी व सक्षम युवाओं को रोजगार देने के बजाय मनपा से ही सेवानिवृत्त कर्मियों-अधिकारियों (सोनावणे,सिद्दीक़ी आदि -आदि दर्जनों ) को पुनः विभिन्न विभागों सह मनपा से संलग्न कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का सिलसिला जारी है. इन्हें सिर्फ नियुक्ति ही नहीं बल्कि इन्हे मलाईदार वेतन दर माह दिया जा रहा है. कुछ लोगों का वेतन तो आयुक्त और उपायुक्त स्तर के अधिकारी से भी अधिक होने की चर्चा है. साथ ही इन्हें पेंशन का भी लाभ मिलने से दोहरे लाभ का मजा ले रहे हैं.

    दूसरी ओर पदाधिकारियों ने उक्त अधिकारियों को पहले बिना देखे समझे सेवानिवृत्तों को उनके मलाईदार विभाग में सेवारत तो करवा दिया. अब जब इन अधिकारियों ने अपना रंग दिखाना शुरू किया तो इन पदाधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई. ऐसे में छुब्ध अब लग गए हैं उक्त अधिकारियों को जमीन पर लाने सह अधिकार में कटौती करने में. समाचार लिखे जाने तक सत्तापक्ष सेवानिवृत्तों पर किए गए उपकार से सकते में आ गया है.


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