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Published On : Fri, Aug 16th, 2019

३० मिनट में ४ दर्जन विषयों को मिली मंजूरी

– स्थाई समिति के बजट निर्माता का कथन

नागपुर: गत स्थाई समिति की बैठक मात्र आधा घंटा भी नहीं चली जिसमें लगभग ४ दर्जन विषयों को मंजूरी प्रदान की गई.जिन विषयों में तालमेल नहीं बैठा उसे तकनिकी कारणों का हवाला देकर सम्बंधित विभाग में लौटा दिया गया.

प्रत्येक स्थाई समिति की बैठक के पूर्व पार्टी बैठक के नाम पर स्थाई समिति सदस्यों की क्लास ली जाती हैं.जिसमें स्थाई समिति के असल संचालक किस विषयों को अटकना और किसे बिना सोचे समझे मंजूरी देना इसकी पट्टी पढाई जाती हैं.इसमें जिस ठेकेदारों से समझौता नहीं हो पाता,वैसे प्रस्ताव को रोकने के लिए रणनीति तैयार की जाती हैं.समिति सदस्यों को पढाई जाने वाली पट्टी को तैयार करने वाले अपने आका से सलाह मशविरा कर तैयार करते हैं.यहाँ तक कि स्थाई समिति की बैठक में किस विषयों को समाहित किया जाये इसकी भी भूमिका बाहरी वरिष्ठ नगरसेवक तय करते हैं.

स्थाई समिति की बैठक में शामिल प्रस्तावों की कुल राशि का २ % स्थाई समिति के अघोषित खाते में आता हैं.जिसका पिछले २ सालों से वितरण बंद कर दिया गया हैं.२ वर्ष पहले तक प्रत्येक स्थाई समिति की मंजूर विषयों से प्राप्त होने वाली २ % कमाई का १७ हिस्सा हुआ करता था,जिसमें से २ हिस्सा सभापति और शेष १५ हिस्सा अन्य १५ सदस्यों में विभक्त हो जाया करता था.इस क्रम में प्रत्येक वर्ष प्रत्येक स्थाई समिति सदस्यों को १२ से १५ लाख रूपए का नगदी लाभ हो जाया करता था.

पहले स्थाई समिति की बैठकों में आये विषयों पर चर्चा हुआ करती थी,पिछले १७-१८ स्थाई समिति सभापति का अनुभव प्राप्त एक कर्मी इन दिनों सर चढ़ के बोल रहा.वह चुनिंदा पूर्व पदाधिकारी और मनपायुक्त को छोड़ शेष को मनमाफिक निर्देश देने में जरा भी नहीं हिचकता।दावा करता हैं कि स्थाई समिति कार्यालय में सेवानिवृत्ति तक बना रहेंगा।इनका नाटक-नौटंकी का व्यक्तिगत कार्यालय भी यहीं से संचलन होता हैं.इनके इनका दबदबा यहाँ तक हैं कि कड़की में भी मनपा ने इनके नाटक-नौटंकी के राज्य स्तरीय महोत्सव का लाखों में खर्च उठाया।

फ़िलहाल वर्ष २०१९-२० के बजट के हिसाब से किस नगरसेवक/पक्ष को तहरिज देना और कितनी मांग पर कितनी राशि देना,यह यह तय करते हैं.आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पिछले वर्ष के टेंडर हो चुके खासकर सत्तापक्ष प्रस्तावों को तहरिज दी जा रही.दूसरे क्रम में पूर्व नागपुर के सत्तापक्ष नगरसेवकों को महत्त्व देने का क्रम जारी हैं.तीसरे क्रम में स्थाई समिति सदस्यों के २-३ प्रस्तावों को निधि उपलब्ध करवाई जा रही.

शेष को तो उक्त कर्मी कार्यालय में कुर्सी पर बैठों तो उठा कर भगाने में जरा भी नहीं हिचकता। अब तो न्याय फार्मूला लाया गया की अपने-अपनों का विषय को बजट में ही नाम सहित उसके लिए निधि आरक्षित रखवा दी गई.अर्थात स्थाई समिति का अघोषित रूप से यही कर्मी संचलन कर रहा,यह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी।

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