Published On : Thu, Mar 7th, 2019

लालफीताशाही के फेर में अटकी महिला स्पेशल तेजश्विनी और मिनी बस

परिवहन समिति सभापति के निर्देश को नजरअंदाज कर रहा प्रशासन

नागपुर : मनपा प्रशासन ,मनपा परिवहन विभाग और परिवहन समिति के बीच शुरुआत से ही संघर्ष जारी है. समिति ने जनहित में जितने भी निर्देश दिए तो विभाग और प्रशासन ने अड़ंगे लगाकर अपनी अहमियत जताने का कोई अवसर नहीं छोड़ा. इसका क्रम आज भी जारी है. विभाग और प्रशासन की जेब भार न पड़ने के बाद भी महिला स्पेशल बस तेजश्विनी और मिनी बस सड़क पर नहीं उतर पाई. जबकि मनपा अधिनियम के अनुसार परिवहन समिति सभापति का कद मनपा स्थाई समिति सभापति के बराबरी का है. परिवहन सभापति बंटी कुकड़े ऊर्जावान और जनहित में निर्णय लेने में काफी सक्षम होने से उन्होंने प्रयास किअ लेकिन मनपा प्रशासन ने बिना कारण प्राप्त निधि को अन्य मदों में खर्च कर डाला.

याद रहे कि महिला स्पेशल तेजश्विनी बस के लिए राज्य सरकार, खास कर मुख्यमंत्री ने मनपा को पिछले वर्ष ९ करोड़ से अधिक की राशि दी थी. लेकिन असक्षम परिवहन व्यवस्थापक की लापरवाही की वजह से मनपा प्रशासन द्वारा इस निधि को अन्यत्र खर्च किए जाने की जानकारी मिली थी.

इतना ही नहीं परिवहन समिति सभापति को नज़रअंदाज करने के लिए मनपा प्रशासन ने एक विशेष समिति का गठन किया. जिसमें परिवहन विभाग से सम्बंधित सभी को प्रतिनिधित्व दिया गया. सिर्फ सभापति को महरूम रखा गया. उनके ही नियमित प्रयासों से वर्तमान आयुक्त ने तेजश्विनी बस के लिए निधि उपलब्ध करवाने की हामी भरी और टेंडर जारी किया. क्यूंकि टेंडर में एकमात्र कंपनी ने भाग लिया इसलिए विभाग सह प्रशासन नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने में आनाकानी कर रही है.

ऐसा ही रहा तो लोकसभा की चुनावी की आचार संहिता तो लग ही जाएंगी,गडकरी का सपना अधूरा और सभापति कुकड़े का प्रयास भी पानी में चला जाएगा. दूसरी ओर परिवहन सेवा शुरू करते वक्त तीनों ऑपरेटरों से करार किया गया था कि उन्हें क्रमवार सभी को खुद के खर्च पर १५-१५ मिनी बस भी खरीद कर आपली बस बेड़े में शामिल करना अनिवार्य है. इस मामले में भी लगभग २ साल से परिवहन विभागऔर मनपा प्रशासन की जुगलबंदी से ४५ मिनी बस का मामला लटका पड़ा है. इससे मनपा को अनेक फायदे तो मिलेंगे साथ में पुरानी-खटारी स्टैण्डर्ड बसें को बेड़े से हटाने का मार्ग प्रसस्त हो सकता है.