
नागपुर: ‘निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड’ के नंदनवन स्थित मुख्यालय में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब बड़ी संख्या में जमाकर्ता और खाताधारक अपनी जमा राशि वापस लेने की मांग को लेकर कार्यालय पहुंच गए। मैच्योरिटी पूरी होने के बावजूद भुगतान नहीं होने से नाराज जमाकर्ताओं ने कार्यालय परिसर में हंगामा किया। भीड़ बढ़ने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नंदनवन और कोतवाली थाने से पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिस तैनाती के बाद आयकर छापे की अफवाह
सोमवार सुबह संस्था के मुख्य कार्यालय और संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े के कक्ष के बाहर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी दिखाई दी। पुलिस बंदोबस्त की जानकारी फैलते ही संस्था पर आयकर विभाग की छापेमारी होने की अफवाह फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में खाताधारक अपने पैसों की चिंता को लेकर कार्यालय पहुंचने लगे।
हालांकि, बाद में स्पष्ट किया गया कि संस्था के कार्यालय में आयकर विभाग की कोई छापेमारी नहीं हुई थी। बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के एकत्र होने और संभावित विवाद को देखते हुए एहतियात के तौर पर पुलिस बंदोबस्त लगाया गया था।
मैच्योरिटी के बाद भी भुगतान नहीं होने से बढ़ी चिंता
जमाकर्ताओं की ओर से पिछले कई महीनों से मैच्योरिटी पूरी होने के बावजूद जमा राशि का भुगतान नहीं किए जाने की शिकायतें की जा रही हैं। कुछ जमाकर्ताओं के चेक बाउंस होने का दावा भी सामने आया है।
इसी बीच, संस्था में 51.70 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली स्थित सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसायटीज की ओर से लिक्विडेशन का नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जमाकर्ताओं की चिंता और बढ़ गई है।
जमाकर्ताओं ने सरकार और सहकारिता विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उनकी जमा राशि वापस दिलाने की मांग की है।
50 से अधिक शाखाओं में जमा है बड़ी रकम
बताया जाता है कि संस्था की 50 से अधिक शाखाओं में आम नागरिकों और व्यापारियों की बड़ी रकम जमा है। लंबे समय से भुगतान को लेकर बनी स्थिति के कारण खाताधारकों में असंतोष बढ़ रहा है।
हाल ही में आयोजित संस्था की वार्षिक आमसभा में संस्थापक सचिव प्रमोद मानमोड़े ने स्थिति सामान्य करने के लिए 45 से 60 दिनों का समय मांगा था। जमाकर्ताओं का कहना है कि यह अवधि बीतने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।
जमाकर्ताओं और प्रबंधन के दावे अलग-अलग
जमाकर्ताओं का आरोप है कि संस्था में जमा राशि के मुकाबले ऋण वितरण कम है और संस्था की रकम अन्यत्र निवेश की गई है। दूसरी ओर, संस्था प्रबंधन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त संपत्ति मौजूद है और जमाकर्ताओं की राशि सुरक्षित है।
प्रबंधन के अनुसार मौजूदा समस्या लिक्विडिटी की कमी से संबंधित है और स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सोमवार को बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं के मुख्यालय पहुंचने से पैदा हुए तनाव के बीच पुलिस ने मौके पर तैनाती बनाए रखी और स्थिति पर नजर रखी।



