
नागपुर: अदालत में न्यायाधीशों के साथ कथित दुर्व्यवहार, धमकी और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना वकील पिता-पुत्र को भारी पड़ गया। बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने दोनों वकीलों पर कुल एक लाख रुपये का दावा खर्च और 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा को भेजने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्तिद्वय उर्मिला जोशी-फलके और राज वाकोड़े की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि न्यायाधीशों को धमकाना, ऊंची आवाज में बात करना और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना गंभीर कृत्य है। यह केवल न्यायाधीश का अपमान नहीं, बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा पर हमला है।
मामला यवतमाल जिले के आर्णी का है। संबंधित वकीलों की पहचान अधिवक्ता सागर राठोड़ और उनके पिता अधिवक्ता दुर्गादास राठोड़ के रूप में हुई है। घटना 26 नवंबर 2021 की है। उस समय प्रथम श्रेणी न्याय दंडाधिकारी साजीदुज्जमान मोहम्मद हनीफ शाहीद की अदालत में एक मामले की सुनवाई चल रही थी।
वारंट रद्द नहीं होने पर जताई थी नाराजगी
आरोपी का वारंट रद्द नहीं किए जाने से नाराज दोनों वकीलों ने कथित तौर पर न्यायाधीश के साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोप है कि उन्होंने न्यायाधीश से कहा था कि वे उन्हें देख लेंगे, बार का प्रस्ताव लेकर कार्रवाई करेंगे और भ्रष्टाचार के सबूत वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखेंगे।
हाईकोर्ट ने इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इस तरह का आचरण न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाला है।
हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों के साथ धमकी या दबाव की भाषा में व्यवहार केवल किसी एक न्यायाधीश का अपमान नहीं है, बल्कि इससे न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा और निष्पक्षता प्रभावित होती है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बिना शर्त माफी भी नहीं आई काम
दोनों वकीलों ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि माफी वास्तविक पश्चाताप का प्रतीक होनी चाहिए, न कि सजा से बचने के लिए अपनाई गई रणनीति या महज कागजी औपचारिकता।
हाईकोर्ट ने दोनों वकीलों पर एक लाख रुपये का दावा खर्च और 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।



