Published On : Sat, Mar 25th, 2017

मनपा की आर्थिक स्थिति पर श्वेतपत्र जारी हो : वेदप्रकाश आर्य

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नागपुर: मनपा की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए मनपा प्रशासन को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। उक्त मांग एनसीपी नेता वेदप्रकाश आर्य ने मनपायुक्त से की।

आर्य के अनुसार मनपा प्रशासन को ७८.८१ करोड़ रुपए प्रति माह वेतन, पेंशन, बिजली खर्च, कच्चे पानी खरीदी, पेट्रोल-डीज़ल, फ़ोन-मोबाइल-फैक्स, लोन की मासिक किस्तों में चुकारा, जेएनएनयूआरएम प्रकल्पों में मनपा का शेयर, स्वच्छता-साफ़-सफाई पर मासिक खर्च, लाइटिंग-मरम्मत आदि पर मासिक खर्च तय है। इस हिसाब से प्रति वर्ष मनपा उक्त सभी मामलात में ९४५ करोड़ रुपए खर्च करती है।

नागपुर महानगरपालिका ने बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र से वर्ष २०११-१२ में २०० करोड़ रुपए, वर्ष २०१४-१५ में २०० करोड़ रुपए और वर्ष २०१६-१७ में १०० करोड़ रुपए के ऋण लिए हैं।

वर्तमान आर्थिक परिस्थिति में जब से चुंगी व एलबीटी बंद किये जाने से मनपा के स्थाई कर्मियों को डेढ़-दो माह देरी से वेतन किया जा रहा है। साथ ही मनपा के अधिकांश ठेकेदारों को लगभग १ वर्ष से काम समाप्ति के बावजूद भुगतान नहीं किया गया है।

वेदप्रकाश आर्य के अनुसार पानी का निजीकरण की वजह से १०० करोड़ का आर्थिक नुकसान मनपा प्रति वर्ष उठा रही है। फ़िलहाल मनपा के पास जल कर,संपत्ति कर, नगर रचना विभाग में मंजूर होने वाले नक़्शे के एवज में होने वाली आय, अग्निशमन विभाग संबंधी एनओसी से होने वाली आय, मनपा के बाजार के दुकानों से किराया/लीज रेंट आदि से होने वाली आय ही आवक का जरिया रह गया है। जिसमे से भी ६०% ही वसूल की जाती है, वजह साफ़ है कि मनपा की ढुलमुल नीति सह कर्मचारियों की अति कमतरता है। राज्य सरकार ने एलबीटी रद्द करने से मनपा की रीढ़ की हड्डी टूट गई है।

इस मामले में मनपा पूर्ण-रूपेण राज्य सरकार के अनुदान पर आश्रित हो गई है। अब सिर्फ कहने भर के लिए शेष रह गया है कि नागपुर मनपा स्थानिक स्वराज संस्था है।

इसलिए आर्य ने मनपा प्रशासन से मनपा की वर्तमान आर्थिक परिस्थिति के मद्देनज़र श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।