
नागपुर: नागपुर ग्रामीण पुलिस के अंतर्गत आने वाले वेलतुर क्षेत्र में अवैध मुरूम और मिट्टी उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। आधी रात को छापा मारने पहुंचे नायब तहसीलदार की जान उस समय जोखिम में पड़ गई, जब जेसीबी चालक ने वाहन रोकने के बजाय उन्हें घसीटते हुए तेज रफ्तार से भगाने की कोशिश की। घटना से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, नायब तहसीलदार बुद्धभूषण अर्जुनराव निकाळजे को 5 मई 2026 की रात करीब 10:30 बजे सूचना मिली थी कि मौजा बोरी नाईक शिवार की गावठाण जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी और मुरूम का उत्खनन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर उन्होंने राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर दबिश दी। टीम में ग्राम महसूल अधिकारी मोहन पवार, आनंद मस्के, महसूल सेवक निलेश तिरपुडे और दो पंच गवाह शामिल थे।
छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर दो ट्रैक्टर और एक जेसीबी मशीन को अवैध उत्खनन करते पाया। नायब तहसीलदार ने जेसीबी चालक को रोककर खुद का परिचय दिया और कार्रवाई की जानकारी दी, लेकिन आरोपी चालक ने वाहन रोकने के बजाय अचानक जेसीबी तेज रफ्तार से भगा दी।
बताया जा रहा है कि उस समय नायब तहसीलदार जेसीबी के किनारे लटके हुए थे और लगातार वाहन रोकने की गुहार लगा रहे थे। इसके बावजूद आरोपी चालक ने जेसीबी सड़क किनारे पेड़ों की दिशा में दौड़ा दी, जिससे अधिकारी की जान पर बन आई। घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इसी बीच सामने से पुलिस वाहन आता देख आरोपी ने जेसीबी रोक दी और अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकला। सूचना मिलते ही वेलतुर पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल जांच शुरू की।
नायब तहसीलदार की शिकायत पर वेलतुर पुलिस ने अपराध क्रमांक 102/2026 के तहत सरकारी कार्य में बाधा डालने, जान जोखिम में डालने, अवैध उत्खनन, पर्यावरण संरक्षण कानून तथा महाराष्ट्र भूमि महसूल अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शिकायत दर्ज होने के महज एक घंटे के भीतर आरोपी को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उसके खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 56 अथवा एमपीडीए के तहत कठोर कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
हालांकि घटना में नायब तहसीलदार को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उनकी मेडिकल जांच कराई गई है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध खनन माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस और प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।








