Published On : Wed, Jan 24th, 2018

मनपा स्कूल के विद्यार्थियों को मिल रहेआम के आम, गुठलियों के दाम!


नागपुर: दो साल पहले सेमी-इंग्लिश स्कूल बनने के बावजूद भी केजी-1 से लेकर चौथी तक केवल 15 ही विद्यार्थी नागपुर महानगर पालिका के ऊंटखाना की मराठी प्राथमिक शाला में पढ़ रहे हैं. स्कूल काफी पुरानी है. स्कूल की इमारत भी काफी अच्छी है. लेकिन विद्यार्थियों की लगातार घटती हुई संख्या शिक्षकों की परेशानी बढ़ा रही है. इस स्कूल के शिक्षकों ने अपने खर्च पर एक ऑटो लगाया है. जिसमें दूर से आनेवाले 10 विद्यार्थी रोजाना स्कूल आते हैं. ऑटोचालक को इसके 3 हजार रुपए महीना दिया जाता है. इससे भी ख़ास बात यह है कि यहां पर दो महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें घर से रोजाना विद्यार्थियों को स्कूल लाने के लिए 100 रुपए प्रति विद्यार्थी के हिसाब से उन्हें पैसे दिए जाते हैं. साथ ही कई ऐसे विद्यार्थी भी है. जिनके अभिभावकों को भी 200 रुपए महीना शिक्षकों की ओर से दिए जाते है. ताकि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजे.

जिसका भुगतान भी शिक्षक अपनी ही जेब से करते है. विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए और विद्यार्थी दूसरी स्कूलों में न जाए या फिर स्कूल न छोड़े इसके लिए शिक्षकों का प्रयास नागपुर महानगर पालिका के प्रयास से भी ज्यादा दिखाई दे रहा है. जिस तरह से स्कूल के शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए योजनाए शुरू की गई है उससे मनपा प्रशासन को कुछ सोचना चाहिए और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए अपने स्तर पर कुछ योजनाएं शुरू करनी चाहिए. नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब मनपा स्कूल ही बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी. अब बात करते हैं स्कूल में पढ़ानेवाले शिक्षकों की. स्कूल में कुल मिलाकर 3 ही शिक्षिकाएं और प्रिंसिपल को मिलाकर. इन शिक्षिकाओं में से एक शिक्षिका ऐसी है जो आए दिन छुट्टी पर ही रहती है और वह कुछ ही दिनों में वह रिटायर होनेवाली है. स्कूल में 4 रूम है. एक सफाईकर्मी है लेकिन स्कूल में चपरासी नहीं है.


स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाएं

स्कूल में केजी- 1 और केजी 2 के लिए अतिरिक्त शिक्षक नहीं है. जिसके कारण उन्हें पढ़ाने में परेशानी होती है. केजी 1 में 2 और के-जिटू में 4 विद्यार्थी हैं. इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अतिरिक्त शिक्षक देने के लिए स्कूल प्रबंधन ने मनपा के शिक्षा विभाग को निवेदन भी दिया था. लेकिन मनपा के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना था कि जब क्लास में विद्यार्थियों की संख्या 15 होगी तभी वह अतिरिक्त शिक्षक देंगे. यानी सेमी इंग्लिश भी केवल नाम के लिए ही रह गई है. स्कूल में कंप्यूटर नहीं है. प्रिंसिपल के रूम में भी कंप्यूटर नहीं है. विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था और शौचालय की व्यवस्था ठीक ठाक ही है. स्कूल में साफसाफई भी दिखाई दी. स्कूल का परिसर काफी बड़ा है. जिससे विद्यार्थियों को खेलने के लिए काफी जगह है.


क्या कहती है स्कूल की प्रिंसिपल

स्कूल की प्रिंसिपल कल्पना निकम ने बताया कि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास शुरू है. विद्यार्थियों के परिजनों से मिला जा रहा है. कुछ विद्यार्थी बढ़े भी हैं. उन्होंने बताया कि बीएलओ का काम देने की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है. कुछ विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी 200 रुपए महीना दिया जाता है. जिससे की वे अपने बच्चों को स्कूल में भेजे. साथ ही इसके दो महिलाए भी हैं. जिन्हें एक बच्चे को घर से स्कूल लाने के लिए प्रति विद्यार्थी 100 रुपए महीना दिया जाता है. निकम ने बताया की इंग्लिश मीडियम स्कूल ज्यादा होने की वजह से भी मनपा की स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है.



—शमानंद तायडे