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    Published On : Thu, Dec 20th, 2018
    nagpur samachar / News 3 | By Nagpur Today Nagpur News

    मिड से मील योजना के तहत बच्चों को परोसे गए भोजन में चावल कच्चे,सब्ज़ी के मटर अधकच्चे मिले

    नागपुर : नागपुर में स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन में फिर खराबी सामने आयी है। रोज की तरह गुरुवार को भी पश्चिम नागपुर के स्कूलों को मिड डे मील योजना के तहत भोजन का वितरण किया गया। आरोप है कि स्कूलों में गुरुवार को बच्चों को दोपहर के भोजन के लिए परोसे गए खाने में कच्चे चावल के दाने और मटर की सब्ज़ी में मटर अच्छे से पकी ही नहीं थी।

    आरटीआई एक्शन कमेटी एनजीओ के अध्यक्ष शहीद शरीफ ने नागपुर टुडे को बच्चों को परोसे गए भोजन की तस्वीर भेजी है। जिसमे उन्होंने दावा किया है कि मिड डे मील योजना की नियम और शर्तो को दरकिनार कर बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। इससे पहले भी मध्यान भोजन को लेकर लगातार शिकायतें आती रही है बावजूद इसके भोजन की गुणवत्ता में सुधार का प्रयास नहीं हो रहा है।

    नागपुर में स्कूलों में मिड डे मील योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी अक्षय पात्रा नामक संस्था के पास है। शरीफ के आरोपों पर संस्था का जवाब लेने के लिए नागपुर में योजना के समन्वयक प्रशांत भगत से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि ऐसा संभव ही नहीं है। किचन से तैयार होने वाले भोजन को पहले वह खुद खाते है। आज बच्चों को चावल और मिक्स वेज की सब्जी दी गई थी। किचन बड़ा है हजारों बच्चों का खाना एक साथ बॉयलर के माध्यम से तैयार होता है। शिकायते हो सकतीं है पर आज ऐसा कुछ नहीं हुआ। हमारी संस्था के पास गुणवत्ता के प्रमाणपत्र है।

    स्कूली बच्चों को नियमित पोषक आहार की पूर्तता के लिए शुरू मीड डे मील योजना में सामने आयी लापरवाही के बारे में शिक्षा विभाग में इस योजना की निगरानी का जिम्मा संभालने वाले गौतम गेडाम से भी नागपुर टुडे ने संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन बंद बता रहा था। गौतम से प्रतिक्रिया लेने के लिए मैसेज भेजा गया था जिसका भी जवाब उन्होंने नहीं दिया।

    गौरतलबहो की मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जाँच समय-समय पर किया जाना शिक्षा विभाग के लिए बंधनकारक है लेकिन अक्सर भोजन की क्वालिटी को लेकर सामने आने वाले केस सरकारी यंत्रणा के काम काज पर सवालिया निशान खड़ा करते है। शरीफ ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग द्वारा कि जाने वाली जाँच नहीं की जाती है जिसका नतीजा जैसा भोजन बच्चों को मिलाना चाहिए वह नहीं मिल पाता है।

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