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    Published On : Wed, Oct 24th, 2018

    मुन्ना यादव को हाईकोर्ट से राहत

    नागपुर: महाराष्ट्र बांधकाम एवं अन्य कामगार कल्याण मंडल के अध्यक्ष मुन्ना यादव एवं परिवार के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा कम करने को चुनौती देते हुए मामले की सीबीआई से जांच कराने को लेकर गीता यादव और नविता यादव की ओर से हाईकोर्ट में फौजदारी याचिका दायर की गई है.

    याचिका में कोई भी फैसला करने से पहले प्रतिवादी के रूप में अपना पक्ष रखने का मौका देने का अनुरोध करते हुए अब मुन्ना यादव की पत्नी पार्षद लक्ष्मी यादव और पुत्र करण यादव की ओर से इंटरविनर अर्जी दायर की गई. याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश रवि देशपांडे और न्यायाधीश विनय जोशी ने मामले की हुई जांच पर संतुष्टि जताते हुए सीबीआई को सौंपने से इंकार कर दिया. साथ ही याचिका ठुकरा दी. लक्ष्मी यादव की ओर से अधि. राजेन्द्र डागा और करण यादव की ओर से अधि. मोहित खजांची तथा गीता और नविता यादव की ओर से अधि. रजनीश व्यास ने पैरवी की.

    ‘युनिक’ मामला कैसे, खुलासा करे पुलिस
    नविता यादव द्वारा दायर याचिका में बताया गया था कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के कारण इस संदर्भ में पुलिस आयुक्त के. व्यंकटेशम से 2 बार मिलने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनसे भेंट नहीं हो पाई. इसके अलावा पुलिस विभाग ने इस मामले को युनिक करार दिया है. कानून के अनुसार समन और वारंट जैसे ही 2 प्रकार के मामले होते हैं. जिससे अलग प्रकार में यह मामला युनिक कैसे है, इसका खुलासा पुलिस विभाग द्वारा करने की मांग उन्होंने की. याचिकाकर्ता ने लंबा समय बीत जाने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने एवं पूरी तरह राजनीतिक दबाव होने के कारण मामले की जांच सीबीआई या सीआईडी को सौंपे जाने की मांग भी याचिका में की गई थी.

    पुलिस से मांगा था जवाब
    याचिकाकर्ता की ओर से पुलिस जांच पर संदेह जताए जाने के बाद अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब दायर करने के आदेश दिए थे. उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर की रात पटाखों को उड़ाने को लेकर मुन्ना यादव और मंगल यादव के गुट में जमकर मारपीट हुई. जिसमें पुलिस ने मुन्ना यादव, उनकी पत्नी पार्षद लक्ष्मी यादव, पुत्र करण और अर्जुन तथा उनके भाई जग्गू यादव के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया.

    इसी तरह मंगल यादव, पापा यादव, गब्बर यादव, सागर यादव, मंजूर यादव एवं अन्य साथियों के खिलाफ भी गैरकानूनी ढंग से लोगों को जमा कर मारपीट करने का मामला दर्ज किया. घटना होने के बाद मुन्ना यादव के परिजनों का मेडिकल किया गया. पीएम रिपोर्ट के बाद मंगल यादव और उसके साथियों के खिलाफ भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया था.

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