Published On : Thu, Jul 4th, 2019

गणेश टेकडी के सामने की जमीन का पुन: विवाद

नागपुर: गणेश टेकड़ी फ्लाईओवर के सामने स्थित एमपीएसआरटीसी की जमीन को अधिग्रहित करने की चल रही प्रक्रिया के बीच ही गत समय दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत की ओर से भले ही सुनवाई के बाद इस पर रोक लगा दी, लेकिन अब पुन: इस जमीन को नजूल की होने का कारण देते हुए जिलाधिकारी की ओर से मध्यप्रदेश बस अड्डा, राज्य परिवहन महामंडल और माडल स्कूल व्यवस्थापन को जमीन अधिग्रहण को लेकर नोटिस जारी किया गया.

इस तरह से जमीन अधिग्रहण किए जाने से स्कूल में पढ़नेवाले 500 से अधिक छात्रों का भविष्य खतरे में होने का हवाला देते हुए राकेश मोहोड़ और अन्य 2 की ओर से जनहित याचिका दायर की गई. जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश रवि देशपांडे और न्यायाधीश विनय जोशी ने राज्य के राजस्व विभाग, जिलाधिकारी और मनपा को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब दायर करने के आदेश दिए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. शशांक अग्रवाल ने पैरवी की.

8.25 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधि. अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 8.25 एकड़ जमीन में से 2.18 एकड़ जमीन मध्यप्रदेश सरकार को आवंटित की थी. जहां से मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अंतरराज्यीय बस सेवा शुरू की गई. इसी समय से उक्त जमीन मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के पास है. इसके अलावा 4.5 एकड़ जमीन माडल स्कूल व जूनियर कालेज के पास है. जहां कालेज का संचालन हो रहा है. 1960 से संचालित हो रही स्कूल व कालेज में वर्तमान में 500 छात्र शिक्षा ले रहे हैं. इसी के करीब महाराष्ट्र राज्य परिवहन महामंडल का विभागीय कार्यालय है.

मेट्रो रेल कार्पोरेशन द्वारा मॉल का निर्माण
अधि. अग्रवाल ने कहा कि जमीन को अधिग्रहण करने के बाद इसे मेट्रो रेल कार्पोरेशन को आवंटित किया जाना है. जहां मेट्रो की ओर से बहुमंजिला व्यापारिक संकुल और होटल के निर्माण का प्रस्ताव है. इसी उद्देश्य से हाल ही में जिलाधिकारी की ओर से जमीन खाली करने नोटिस जारी किया गया.

जमीन खाली करने पर न केवल परिसर में व्यवसाय कर रहे लोगों का रोजगार छीन जाएगा, बल्कि यहां शिक्षा ले रहे छात्रों का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा. अत: जिलाधिकारी द्वारा जारी नोटिस को रद्द करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया. याचिकाकर्ता ने अवैध रूप से जमीन खाली कराने की प्रक्रिया से प्रतिवादियों को रोकने का अनुरोध भी किया. सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी किया.