Published On : Mon, Mar 9th, 2015

बुलढाणा : शराबबंदी के लिए ‘बिना छत्र बोतल बैठो’ आंदोलन

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For Ban Liqour
बुलढाणा। बुलढाणा जिले में अवैध शराबबंदी की मांग के लिए अस्तित्व महिला बहुउद्देशिय संस्था सोनाला अध्यक्षा प्रेमलता वाघ सोनोने के नेतृत्व में 8 मार्च जागतिक महिला दिवस के अवसर पर जिला अधिकारी कार्यालय के सामने ‘विना छत्र बॉटल बैठो’ आंदोलन किया गया. मांग पूरी नही होने पर तिव्र आंदोलन छेड़ने का इशारा इसदौरान किया गया.

महिलाओं पर पारिवारिक और लैंगिक अत्याचार बढ़ रहा
महिलाओं ने दिए ज्ञापन में कहां गया कि, बुलढाणा जिले के संग्रामपुर तालुका के सोनाला की अस्तित्व महिला बहुउद्देशिय संस्था गत आठ वर्षों से आदिवासी क्षेत्र में तथा महिला बालकल्याण विभाग में कार्य कर रहे है. बुलढाणा जिले में सीएल-3 अनुज्ञप्ती मान्यता प्राप्त 199 दुकानें है. एफएल/बीआर 2 अनुज्ञप्तिधारक 40 है तथा एफएल-2 और सीएल/एफएल/टिओडी-3 अनुज्ञप्तिधारक 20 है. वहीं  एफएल-3 अनुज्ञप्तिधारक 227 है. जिले की कुल आबादी 26 लाख है. यहां वर्ष के अंत तक दो करोड़ की शराब बेचीं जाती है. मतलब एक व्यक्ति एक साल में करीब 15 से 18 हजार की दारू पिने में खर्च करता है. जिससे आरोग्य और आर्थीक हानी उसे बोनस के तौर पर मिलती है. बुलढाणा जिले में माँ जिजाऊ का मायका है. इतना ही नही श्री संत शिरोमणी गजानन महाराज का मंदिर शेगाव में है और इसे विदर्भ की पंढरी के नाम से पहचाना जाता है. इस संत नगरी में भी शराब की बाढ़ आई है. समाजकार्य करते हुए ध्यान में आया कि, महिलाओं पर पारिवारिक और लैंगिक अत्याचार बढ़ रहा है. इसमें 90 प्रतिशत अत्याचार करने वाला व्यसनकर्ता होता है.

देश की महासत्ता और मेक इन इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा?
परिवार का मुख्य व्यक्ति ही शराब के नशे में डूबा रहेगा तो उस परिवार की दयनीय अवस्था देख ही सकते है. घर पर महिला और बच्चों पर अत्याचार होते है. बच्चे अति संवेदनशील होते है. शरब से बार-बार होने वाले पारिवारिक झगडो का परिणाम छोटे बच्चों के मन पर होता है. जिससे बच्चे अपराध क्षेत्र के ओर बढ़ते है और बाल अपराध का प्रमाण बढ़ता है. शराबबंदी नही करने से राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का अपने देश को महासत्ता बनाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा? शराब से समाज में कई घटनाएं  होती है. जिमें बाप अपनी बेटी पर लैंगिक अत्याचार करता है तथा बेरहमी से उसकी हत्या कर देता है. ऐसी घटनाएं इंसानियत पर कालिख पोतने जैसी है. पारिवारिक झगड़ो से तलाक होकर परिवार बर्बाद हो रहे है तथा कई अपनी जान से हाथ धो बैठे है. एक ओर महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए विकास योजना बना रहे है और दूसरी ओर शराब जैसे समाज विघातक बात पर हाथ मिलाया जा रहा है.

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गुजरात का विकास रुका नहीं
गुजरात में शराब बंदी है इसलिए गुजरात का विकास रुका नहीं. महाराष्ट्र को मद्यराष्ट्र ना बनाते हुए एक विकसनशील राष्ट्र बनाने के लिए महिलाओं ने संपूर्ण महाराष्ट्र में शराबबंदी हो ऐसी मांग की है. फिर भी बुलढाणा जिले में शराबबंदी के आदेश निकाले नही तो संपूर्ण बुलढाणा जिले की हजारों महिला जिलाधिकारी कार्यालय के सामने तीव्र आंदोलन छेड़ेंगे ऐसा इशारा अस्तित्व महिला बहुउद्देशिय संस्था सोनाला अध्यक्षा प्रेमलता वाघ सोनोने समेत असंख्य महिलाओं ने किया है.

प्रहार, किसान संघटना का समर्थन
अस्तित्व महिला बहुउद्देशिय संस्था सोनाला संस्था की महिलाओं ने शराबबंदी के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शराब की बोतलों के बीच बैठकर शराबबंदी आंदोलन की शुरुवात की है. इस आंदोलन की ओर जिला प्रशासन ने तुरंत ध्यान दे, 24 घंटे के अंदर ध्यान नही दिया गया तो जिलाधिकारी के दरवाजे पर शराब की बोतले डाली जाएगी. ऐसा इशारा दिया गया है. इस दौरान लखन गाडेकर, संजय इंगले, मिलींद वानखेडे समेत किसान संघटना के युवा प्रदेशाध्यक्ष रविकांत तुपकर, जिला संयोजक नरेंद्र लांजेवार, राणा चंदन, संजय जाधव, संदिप शुक्ला, गणेश निकम, सुधीर देशमुख, चंद्रकांत बर्दे, संजय काले समेत असंख्य नागरिकों ने समर्थन दिया है.

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