Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
    | | Contact: 8407908145 |
    Published On : Thu, May 21st, 2015
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    मूल : दो उद्योग बंद पड़ने से कामगार बेरोजगार


    मूल (चंद्रपुर)।
    तहसील के युवकों को खेती के अलावा दूसरा रोजगार उपलब्ध नही होने से, उन्हें चंद्रपुर-नागपुर-पुणे-मुंबई जैसे जिलों में तथा दूसरे राज्य में रोजगार के लिए भटकना पड़ता है. यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती नजर आ रही है. यह सब देखते हुए राजकीय प्रतिनिधी और उद्योगपतियों ने मिलकर मूल से पांच किमी दुरी पर म-हेगांव में सोयाबीन तेल का कारखाना खड़ा किया. शांतिकुंज साल्वंट प्लांट पर सन 1991 में करोडो खर्च किये गए थे.

    सन 2004 में स्थानीय तालुका के अनेक सुरक्षित युवकों को रोजगार मिला. जिससे सैकड़ो युवकों ने यही अपनी रोजी-रोटी समझकर अपना संसार भी शुरू किया. सब ठीक चल रहा था की कंपनी को कच्चे माल का माल कम पड रहा था और उपलब्ध नही हो रहा था. ऐसी स्थिति में प्लांट बंद पड़ा और सैकड़ों सुरक्षित युवकों पर भूखों मरने की नौबत आ पड़ी. बेरोजगार हुए कामगारों के परिवार की उपजीविका और बच्चों की शिक्षा का गंभीर प्रश्न निर्माण हुआ है. इस बेरोजगार कामगारों को रोजगार देंने की जिम्मेदारी अब राज्य शासन की है. फिर भी उन्हें जो हाथ लगा वो काम देने की मांग जि.प. के पूर्व अध्यक्ष तथा चंद्रपुर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक संतोष रावत ने की है.

    हर जिले में उद्योग निर्माण करके बेरोजगारों को रोजगार देने का वचन देने वाले शासन ने चंद्रपुर जिले के मूल तालुका में बड़े प्रमाण पर अौद्योगिक महामंडल का जाल निर्माण किया है. स्थानिय युवकों को रोजगार मिले इसलिए अौद्योगिक महामंडल ने हजारों हेक्टर जगह खरीदी. अनेक उद्योगपतियों में मिलकर राजुरी स्टील नाम की कंपनी शुरू की. कंपनी के बल बुते पर युवकों ने अपना संसार शुरू किया. कंपनी में अधिक प्रमाण में कच्चा माल स्टील उत्पादन किया जा रहा था.

    उद्योगों को लगने वाला कच्चा माल उपलब्ध करके देने की जिम्मेदारी उद्योग शुरू होने के पहले शासन लेते है. लेकिन राजुरी स्टील कंपनी शुरू हुई तब से स्टील उत्पादन के लिए लगने वाला कच्चा माल आयर्न ओर, प्रोन आर और कोयला अच्छे प्रमाण में उपलब्ध नही हुआ. केवल कच्चे माल के अभाव में कंपनी के कामगारों का वेतन और एक महीने में आ रहे 4 लाख 23 हजार रूपये का विद्युत बिल भरना कठिन हो रहा है. जिससे अनेक कामगार घर पर बैठे है. कंपनी के मशीन की जिम्मेदारी सिक्युरिटी गार्ड पर सौपी है. तालुका में उद्योगधंदे आनेवाले है. इसलिए छात्र महाविद्यालय में उच्च शिक्षा न लेते हुए तांत्रिक शिक्षा की ओर मुड़े है. उनकी आशा पर पानी फिर गया ऐसा चित्र दिख रहा है.

    शांतिकुंज साल्वंट प्लांट और राजुरी स्टील कंपनी बंद पड़ने से सैकड़ों युवकों और कामगारों के परिवारों पर भूखों मरने की नौबत आ पड़ी  है. इन बेरोजगारों की समस्या का प्रश्न सुलझेगा क्या? ऐसी मांग संतोष रावत ने की है.

    unemployment1

    Representational Pic


    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145