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    Published On : Tue, Nov 10th, 2020
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    MLC ELECTION ; संदीप जोशी व अभिजीत वंजारी में सीधी भिड़ंत

    – जोशी को पूर्व एमएलसी व वरिष्ठ भाजपाई का तो वंजारी को नितिन-सतीश गुट का विरोध


    नागपुर : स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी का चुनाव आगामी 1 दिसंबर को होने जा रहा,भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलकर महापौर संदीप जोशी को बनाया तो सेना-एनसीपी-कांग्रेस का संभावित उम्मीदवार अधिवक्ता अभिजीत वंजारी बताया जा रहा.दोनों का पक्ष अंतर्गत भारी विरोध का स्वर उभरने से चुनाव परिणाम किस करवट लेगा,यह गर्मागर्म चर्चा चुनावी विश्लेषकों के मध्य शुरू हो चूका हैं.

    भाजपा में देवेंद्र फडणवीस का प्रभाव बढ़ने से पिछले कुछ समय से फडणवीस के मनमाफिक उम्मीदवारों का चयन का सिलसिला जारी हैं.इस क्रम में नितिन गडकरी खेमे के अनिल सोले को घर बैठाकर देवेंद्र फडणवीस ने अपने निकटतम साथी महापौर संदीप जोशी को उम्मीदवारी दिलवाई,इसके पूर्व पूर्व महापौर प्रवीण दटके मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ था,आज वे भी एमएलसी हैं.

    वहीं दूसरी ओर कांग्रेस-एनसीपी-सेना तिकड़ी के पास इस चुनाव हेतु अधिवक्ता अभिजीत वंजारी को छोड़ कोई दूसरा उम्मीदवार न होने से उनकी उम्मीदवारी फाइनल समझी जा रही.

    जहाँ तक मतदाता बनाने का सवाल हैं,वंजारी पिछले साल से सक्रीय होकर अबतक 1 लाख के ऊपर मतदाता बना चुके हैं,उसके अनुपात में जोशी काफी कम वोटर ही बना पाए.
    वंजारी के पास संगठन की कमी हैं,इसलिए उन्हें वोटर बनाने में खुद काफी मशक्कत करनी पड़ी,वहीं जोशी को इतनी मेहनत-मशक्क्त करने की जरुरत नहीं क्यूंकि यह चुनाव आजतक भाजपा के पक्ष में ही रहा.भाजपा का कैडर वोट काफी बड़ा हैं,जिसका सफल संचलन RSS करती हैं.

    जहाँ तक विरोध का हैं,उम्मीदवार के मान से भाजपा में अधिकांश की चाहत पुनः अनिल सोले की थी,जबकि उनमें वैसी कोई ऊर्जा उनके एमएलसी कार्यकाल में देखी नहीं गई.यह सिर्फ 2 दिग्गज भाजपाई नेताओं के अस्तित्व की लड़ाई के कारण उम्मीदवारी बदली गई. उम्मीदवार बदलने से जोशी को उनके समर्थकों की नाराजगी निश्चित ही झेलनी पड़ेंगी।वहीं दूसरी ओर वंजारी को राजीव सेना और शिवसेना का समर्थन हासिल होने वे जीत को पक्का समझ रहे.इन दिनों दोनों सेना एकमंच पर आ चुकी हैं.

    वंजारी का विरोध पूर्व-वर्त्तमान नगरसेवक वर्ग और नितिन-सतीश गुट कर रहे.क्यूंकि वंजारी ने अबतक इन्हें न विश्वास में लिया और न ही तवज्जों दे रहे.जबकि ऐसे चुनावों में छोटे-छोटे गुटों ( 20 से 50 वोटर बनाने वाले) की अहम् भूमिका रहती हैं.दूसरी ओर जोशी विरोधी कल से सोले व जोशी के स्वाभाव की तुलना कर अपना विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर चुके हैं.

    समझा जा रहा हैं कि मनपा के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष वोटर का फायदा जोशी को मिल सकता हैं,वहीं इस मामले में वंजारी पिछड़ सकता हैं.वंजारी को शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालय में सक्रीय का समर्थन मिल सकता हैं तो भाजपा की परंपरागत वोट बैंक का फायदा जोशी को मिल सकता हैं.
    उक्त चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी हैं,इस महत्वपूर्ण चुनाव में राजीव सेना और नितिन गडकरी का बड़ा रोल रहेंगा,उनका जिन्हें पूर्ण आशीर्वाद रहेंगा,वह इस चुनाव का विजेता बन विधानपरिषद में नज़र आएगा।इसके साथ ही मतदाता सूची का अभी तक अंतिम प्रकाशन नहीं हुआ,अर्थात मतदाता सूची भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करेंगी।

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